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Saharanpur News: पुत्रवधू ने दी तहरीर, जहर खाकर थाने पहुंची सास, हुई मौत

Tue, 25 Aug 2026 01:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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छुटमलपुर(सहारनपुर)। गांव बडेढ़ी घोघु निवासी सुनीता (48) जहरीला पदार्थ खाकर फतेहपुर थाने पहुंच गई। हालत बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने महिला को अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर उसकी मौत हो गई। सुनीता का अपनी पुत्रवधू के साथ झगड़ा हो गया था, जिसके बाद पुत्रवधू ने थाने में जाकर शिकायत कर दी थी। पुलिस ने सुनीता और उसके बेटे को थाने बुलाया था। बेटा पहले पहुंच गया और सुनीता जहरीला पदार्थ खाकर थाने पहुंची थी।
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सोमवार सुबह सुनीता और उसकी पुत्रवधू के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसमें बेटे विकास ने अपनी मां सुनीता का पक्ष लिया था। इस पर पुत्रवधू दोनों मां-बेटे की शिकायत लेकर फतेहपुर थाने पहुंच गई। उसने विकास और सुनीता के खिलाफ महिला हेल्प डेस्क पर तहरीर दी। इसके बाद पुलिस ने फोन कर विकास और सुनीता को थाने आने को कहा। विकास गांव से पहले ही थाने पहुंच गया, जबकि सुनीता फैक्टरी में काम करने भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में चली गई थी। ऐसे में वह दोपहर बाद थाने पहुंची। थाने पहुंचते ही उसने उल्टियां करनी शुरू कर दी। महिला पुलिसकर्मियों ने जब उससे पूछा तो सुनीता ने बताया कि वह जहर खाकर आई है।
पुलिसकर्मी सुनीता को लेकर फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां से मामला गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया, जहां महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद सीओ सदर विकास प्रताप चौहान भी जिला अस्पताल पहुंचे और मामले की जानकारी ली। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए भेजा।
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पारिवारिक विवाद की तहरीर मिलने पर महिला को फोन करके थाने बुलाया गया था। महिला ने पुलिस को दिए बयान में भी खुद जहर खाने की बात कही है। अभी प्रकरण में कोई तहरीर नहीं आई है। यदि तहरीर आती है तो प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जाएगी।
- विकास प्रताप चौहान, सीओ सदर
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स्वाभिमानी महिला थी सुनीता, मजदूरी करके चार बच्चों को पाला
छुटमलपुर। सुनीता के पति राकेश की 20 साल पहले भैंसा-बुग्गी के नीचे दबने से मौत हो गई थी। उसके बाद सुनीता ने मजदूरी करके अपने चारों बच्चों दो बेटों विकास और छोटू तथा दो बेटियों की परवरिश कर उनकी शादियां की। ग्रामीणों का कहना था कि वह स्वाभिमानी महिला थी। शायद उसे यह बात आहत कर गई कि जिस परिवार लिए उसने अपना पूरा जीवन लगा दिया आज उसी की वजह से उसे थाने बुलाया जा रहा है।
सुनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। उसके पास जमीन नहीं है। मजदूरी करके ही चारों बच्चों को पाला पोसा। वर्तमान में भी वह फैक्टरी में मजदूरी करती है। तीन साल पहले एक बेटे छोटू की बीमारी से मौत हो गई थी। उसके बाद उसकी पत्नी को उसके मायकेवाले अपने साथ ले गए थे। दूसरा बेटा विकास उसकी पत्नी और दो बच्चे सुनीता के साथ रहते थे। बेटा विकास देहरादून में रेपिडो में काम करता है। दो दिन पहले ही वह गांव आया था। पड़ोसियों ने बताया कि सुनीता ने चार माह पहले कर्ज लेकर इस उम्मीद से बेटे विकास को नौकरी करने के लिए विदेश भेजा था कि वहां से उनकी हालत में सुधार आ जाएगा। बताया जाता है कि वह वहां किसी ठग गिरोह के हत्थे चढ़ गया और मुश्किल से एक माह में छूटकर घर आया था। उसके बाद वह रेपिडो में काम करने लगा। पड़ोसियों ने बताया कि पिछले दो-तीन माह से सास-बहू में अक्सर कहासुनी होती रहती थी।
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