सहारनपुर में लॉकडाउन के दौरान अंबाला रोड़ हाइवे पर प्रवासी मजदूर के जाम के दौरान हंगामा करते मजद?
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सहारनपुर। हजारों की संख्या में हाईवे पर जुटकर हंगामा करने वाले प्रवासी मजदूरों में बड़ी संख्या में महिलाओं के अलावा बच्चे, किशोर और युवा शामिल रहे। घर जाने की जिद में ये मजदूर कोरोना संक्रमण से जिंदगी के खतरे को भी भूल गए। बच्चों से लेकर बड़ों तक में अधिकांश के पास न तो मास्क था। न ही कहीं सोशल डिस्टेंसिंग की परवाह। जैसे ही उन्हें बसें लेने के लिए पहुंची तो सामान उठाकर बसों की ओर दौड़ पड़े। इन मजदूरों को मेेनेज करने के चक्कर में रोडवेज आरएम मनोज कुमार पुंडीर भी कई बार थककर बैठ गए और मोबाइल पर ही दिशा निर्देश देने लगे।
श्रमिकों की भीड़ ने बढ़ा दिया कोरोना का खतरा
हंगामे के दौरान कई अफसर यह भी चर्चा करते रहे कि श्रमिकों की यह भीड़ आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है। यही वजह रही कि इन्हें गंतव्यों तक भिजवाने की तैयारी में अधिकारियों के हाथ पांव फूले रहे।
लगातार ट्रेनें और बसें मिलती तो ऐसा न होता
लॉकडाउन के बाद से ही प्रवासी मजदूर पैदल, साइकिलों पर, बसों से और यमुना नदी पार करने के अलावा खेतों से भी काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। हंगामा करने वाले बिहार के मजदूर रघवीर, किशन, बिट्टू और भवानी का आरोप था कि यूपी वालों को तो निकाला जाता रहा मगर बिहार के लोगों के लिए लगातार बसें और ट्रेनें नहीं मिलीं। यदि यह समय पर मिलती रहतीं तो शायद ऐसे हालात न होते।
मजदूरों के हंगामे के बाद बार्डर पर रोकी 70 से ज्यादा बसें
हाईवे पर मजदूरों के हंगामे के बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यूपी हरियाणा बार्डर पर 70 से अधिक बसों को रोक दिया गया। इसके साथ ही सीमाओं पर पुलिस टीमों को अलर्ट किया गया है। आश्रय स्थल पर निगरानी के लिए रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात कर दी गई है।
सहारनपुर में लॉकडाउन के दौरान अंबाला रोड़ हाइवे पर प्रवासी मजदूर के जाम के दौरान हंगामा करते मजद?- फोटो : SAHARANPUR