सहारनपुर। रोडवेज की कुछ बसों में सफर करना जोखिम भरा है। किसी बस में शीशा नहीं है तो किसी की सीटें फटी हुई हैं। प्लास्टिक की रस्सी से शीशों को बांध रखा है। सर्द हवा से यात्रियों की कंपकंपी छूट रही है। चालक वर्कशॉप में बस को जमा करते समय रजिस्टर में खामियों के बारे में लिखते हैं।
सहारनपुर परिवहन निगम परिक्षेत्र के अधीन छह डिपो आते हैं। इनमें सहारनपुर, छुटमलपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, खतौली और गंगोह शामिल हैं। इनमें 444 निगम और 133 बसें अनुबंधित चल रही। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम तकनीकी रूप से खुद को मजबूत करने में जुटा है। विभिन्न योजनाओं के जरिए रोडवेज की बसों से यात्रा करने वालों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल तो की जा रही है, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है। रोडवेज की कुछ बसें ऐसी हैं, जिनमें शीशे टूटे हुए हैं। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि रेलवे रोड रोडवेज बस स्टैंड पर देहरादून और हरिद्वार जाने वाली कुछ बसों में शीशे गायब मिले। एक बस तो ऐसी मिली, जिसमें आगे की तरफ कोने वाला शीशा टूट चुका था। टूटा शीशा न दिखें, इसके लिए लोहे की परत लगा रखी है। कुछ शीशों को प्लास्टिक की रस्सी से बांधा हुआ था, ताकि शीशा टूटकर न गिर सके। इतना ही नहीं सीटों के कवर फटे हुए थे। कुछ बसें तो जर्जर हालत में हैं। वर्कशॉप में बसों के ठीक होने में भी कईं दिन लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि सामान के अभाव में बसें खड़ी रहती है। हजारों यात्री न सिर्फ सर्द हवाएं झेल रहे हैं, बल्कि उनकी जान भी जोखिम में हैं।
सर्दी में सफर के दौरान यात्रियों को बसों में कोई दिक्कत न हो, इसलिए सर्वे कराया जा रहा है। अगर किसी का शीशा टूटा या गायब है, तो चालक बस को वर्कशॉप में लेकर आए, ताकि उसे ठीक कराया जा सके।
- अनिल कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम
प्लास्टिक की रस्सी से बांधे गए बसों के शीशे- फोटो : SAHARANPUR
रस्सी से बंधा हुआ खिड़की का शीशा- फोटो : SAHARANPUR
रोडवेज बस का टूटा शीशा- फोटो : SAHARANPUR