संविधान बचाने और पदोन्नति में आरक्षण बहाल कराने की मांग को लेकर दलितों की हुजूम सड़कों पर उतर पड़ा। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत करीब डेढ़ हजार की संख्या में दलितों ने पहले घंटाघर और बाद में कलक्ट्रेट तिराहे पर जाम लगाया। भीड़ की जिद पर प्रशासन ने रविवार के अवकाश में भी कलक्ट्रेट का मेन गेट खोला। इसके बाद डीएम की अनुपस्थिति में सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अनेक थानों की पुलिस मौजूद रही।
जिला प्रशासन से रैली की अनुमति मिलने के बाद संविधान बचाओ समिति ने करीब 15 दिन पहले ही 20 सितंबर को संविधान एवं आरक्षण बचाओ महारैली निकालने का ऐलान किया हुआ था। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दलित समाज के सरकारी कर्मचारी और युवक देहरादून रोड स्थित संत रविदास छात्रावास पर सुबह दस बजे से ही जमा होना शुरू हो गए थे। यहां डेढ़ बजे तक सभा करने के बाद रैली शुरू की गई, जो जनकपुरी तिराहे से होते हुए घंटाघर पहुंची।
रैली में युवक बैनर, पंपलेट लिए हुए थे, जो नारे लगाते हुए चल रहे थे।
बड़ी संख्या में वाहनों पर लोग सवार थे, जिन्होंने घंटाघर पहुंचकर करीब 15 मिनट तक रोड जाम कर दिया। चारों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई, जिससे राहगीरों को परेशानी हुई। इसके बाद रैली चलकर कोर्ट रोड से होते हुए कलक्ट्रेट तिराहे पहुंची। यहां करीब डेढ़ हजार दलित पुरुषों और महिलाओं ने सड़क पर बैठकर सरकारों और न्यायपालिका के खिलाफ नारेबाजी की। देहात कोतवाली, नगर कोतवाली, मंडी कोतवाली, सदर बाजार कोतवाली, जनकपुरी चौकी, कुतुबशेर चौकी, हसनपुर चौकी के प्रभारियों को पुलिस बल के साथ बुला लिया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट राजेश गुप्ता और सीओ द्वितीय अमित नागर मौके पर पहुंचे। कलक्ट्रेट तिराहे पर करीब आधा घंटे के जाम के बाद लाउडस्पीकर से संबोधन कर रहे लोगों ने कलक्ट्रेट का गेट खुलवाने की मांग की। इस दौरान अनेक युवक गेट पर जा चढ़े। रोष को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने गेट खुलवाया। इसके बाद डीएम कार्यालय के बाहर जाकर करीब आधा घंटा प्रदर्शन किया गया।
डीएम के जिले से बाहर होने की वजह से सिटी मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन सौंपने वालों में राजकुमार, डॉ. सुभाष सहगल, शमशेर सिंह गौतम, अजय कुमार आदि शामिल थे। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए। प्रदर्शनकारियों में अजित सिंह, शीशराम प्रधान, वेदपाल सिंह, डा. रामानंद, अरुण कुमार, अवनीश कुमार, राकेश नौटियाल, विमल किशोर, सुरेंद्र कुुमार, अवनीश गौतम, राजवीर सिंह, अटल बहादुर सिंह, गुलाब सिंह, दलीप सिंह आदि थे।
देवी-देवताओं के विसर्जन की चेतावनी
संविधान बचाओ समिति ने एक महीने के भीतर पदोन्नति में आरक्षण बहाल न होने पर देवी-देवताओं की मूर्तियों को ढमोला नदी में विसर्जित करने की चेतावनी दी गई।
सामने क्यों नहीं आ रही बसपा
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने दलित अधिकारियों और कर्मचारियों को पदानत किए जाने की निंदा की है। रविवार को हुई बैठक को संबोधित करते हुए प्रांतीय उपाध्यक्ष राकेश कुमार गौतम ने कहा कि बसपा आज तक दलितों के वोट पर सत्ता हासिल करती आ रही है। आज दलितों के अधिकारियों को छीना जा रहा है। ऐसे में बसपा नेत्री मायावती और अन्य नेता कहां हैं? जिलाध्यक्ष साधूराम और महामंत्री रणधीर सिंह ने भी इसकी निंदा की। बैठक में उग्रसेन, सुभाष गौतम, राजेंद्र गौतम, नाथीराम, डॉ. वीरेंद्र कुमार, ऋषिपाल सिंह, संतरपाल, भूप सिंह, सेठपाल, नेकीराम, चंद्रभान आदि थे।