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PHOTOS: घर में ईद जैसी खुशियां, शाहजेब को देख हैरान रह गए लोग, पल-भर में करोड़पति बना ये बच्चा

Sat, 17 Dec 2022 06:17 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
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छोटे दादा के साथ शाहजेब। - फोटो : amar ujala
तीन साल से लापता शाहजेब (11) के मिलने के बाद परिवार में ईद जैसी खुशियां हैं। सहारनपुर में बेहट रोड स्थित डिफेंस कॉलोनी निवासी शाह आलम ने कहा कि अब परिवार में खुशी का माहौल है। बताया गया कि शाह आलम शाहजेब के दादा के छोटे भाई है।  

उनका कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास था कि उनका शाहजेब एक दिन जरूर मिलेगा। हमनें कभी आस नहीं छोड़ी, अल्लाह से शाहजेब के लिए दुआ करते रहे।
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शाहजेब। - फोटो : amar ujala
नागल क्षेत्र के गांव पांडोली निवासी नावेद मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे। पत्नी इमराना से उनको एकलौता बेटा शाहजेब हुआ। सब ठीक चल रहा था। किसी बात को लेकर अनबन हुई तो इमराना आठ साल के बेटे शाहजेब को लेकर नौ जुलाई 2019 को अपने मायके यमुनानगर चली गई। वहां से बिना किसी को बताए बेटे के साथ पिरान कलियर में जाकर रहने लगी। वह दरगाह की साफ सफाई करती थी। पत्नी और बेटे के गम में बीमार नावेद की दिसंबर 2019 में मृत्यु हो गई। इसी दौरान डेढ़ साल पहले कलियर में ही कोरोना से इमराना की भी मौत हो गई। बच्चा शाहजेब लावारिस हो गया।
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छोटे दादा के साथ शाहजेब। - फोटो : amar ujala
वहीं तीन दिन पहले छोटे दादा शाह आलम का दामाद मोबीन पिरान कलियर गया, जहां पर दरगाह के पास रहने वाले दरगाह के पदाधिकारी मुनव्वर के घर के बाहर उसे शाहजेब मिल गया। उनकी सूचना पर परिजन तुरंत पिरान कलियर पहुंचे और शाहजेब को घर ले आए। शाहजेब के घर आने से दादा शाह आलम, दादी शहनाज बानो, चाचा रियाज आलम, शाहनवाज, गुलनवाज, फैयाज आलम समेत सभी परिजन ईद जैसी खुशी मना रहे हैं।

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परिवार के साथ शाहजेब। - फोटो : amar ujala
अब पढ़ कर डॉक्टर बनाना चाहता है शाहजेब
मां इमराना की मौत के बाद शाहजेब ने दरगाह पर काम किया और मांग कर खाना भी खाया। बाद में वह शहजाद की चाय की दुकान पर 150 रुपये रोजाना पर काम करने लगा था। घर लौट कर आए शाहजेब ने बताया कि जब वह गांव से गया था तो नागल के स्कूल में कक्षा दो में पढ़ता था। वह अब पढ़ कर डॉक्टर बनाना चाहता है। दादा शाह आलम का कहना है कि वो बच्चे की पढ़ा कर ऊंची तालीम दिलाएंगे।
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शाहजेब का घर। - फोटो : amar ujala
करीब 75 लाख की संपत्ति की मालिक है शाहजेब
शाहजेब के पिता नावेद ने गांव पांडोली में करीब पांच बीघा जमीन खरीदी और मकान बनाया था। शाहजेब के दादा याकूब रिटायर्ड शिक्षक थे। इमराना के पोते शाहजेब को लेकर जाने और बेटे नावेद की मौत के बाद दादा याकूब ने करीब 75 लाख रुपये कीमत की जायदाद की वसीयत पोते शाहजेब के नाम कर उसकी देखभाल का जिम्मा अपने छोटे भाई शाह आलम को दिया था।
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परिवार के साथ शाहजेब। - फोटो : amar ujala
उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन शाहजेब घर लौट कर आएगा। हालांकि अब जब शाहजेब घर लौट कर आया तो याकूब इस दुनिया में नहीं है, करीब एक साल पहले उनका भी निधन हो गया। शाहजेब के चाचा जावेद भी परिवार के साथ सहारनपुर में ही देहरादून रोड पर रहते हैं। दादा शाह आलम ने बताया कि नावेद और उसके पिता याकूब उनके साथ ही रहते थे। अब शाहजेब भी उनके साथ ही रहेगा।
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शाहजेब - फोटो : अमर उजाला
नावेद का वंश चलेगा, गांव में भी खुशी
पांडोली गांव में शाहजेब के पिता का मकान काफी समय से बंद पड़ा है। जमीन बुवाई के लिए गांव के ही एक किसान को दी हुई है। पड़ोसी जुबेर, शराफत, अहकाम, गययूर, कुर्बान का कहना है कि परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे, अच्छा हुआ वह पिरान कलियर से मिल गया और नावेद का वंश चल गया। बच्चे के मिलने पर गांव में भी खुशी है।
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