बारिश और ओलावृष्टि से फसलें गिरीं, किसानों के चेहरे लटके
सहारनपुर। मौसम का मिजाज ऐसा बदला कि किसानों के चेहरे लटक गए। बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि से फसल खराब हो गई। रात भर शहर से लेकर देहात तक कई जगहों पर ज्यादा तो कहीं कम बारिश हुई। बृहस्पतिवार को बेहट, शाकंभरी, मिर्जापुर और गागलहेड़ी में ओलावृष्टि हुई।
सहारनपुर शहर में बुधवार रात तेज बारिश हुई। इस कारण ठंड का अहसास हुआ। तेज बारिश से फसलें भी खेतों में गिर गईं। बृहस्पतिवार को दिन में शहर में बूंदाबांदी शुरू हो गई। बादलों का डेरा दिनभर आसमान पर रहा। चिलकाना में बुधवार देर रात और बृहस्पतिवार दोपहर बाद से हो रही तेज बारिश के साथ ओले पड़ने से किसानों के चेहरे मुरझा गए। खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों और आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा। किसान राजकुमार, सुधीर कुमार, हुसैन, सुरेश सैनी, जयपाल, अतीक अहमद, इसरान खान, चमन लाल, मांगेराम, सीताराम, रोहताश आदि तथा आम के ठेकेदार कल्लू कुरैशी, हाजी अबरार, साजिद, पप्पू खान आदि ने बताया कि बारिश से फसल खराब तो हो रही थी, लेकिन ओले पड़ने से भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि गेहूं और सरसों की फसल तैयार है, जिसे बारिश तथा ओलों से नुकसान हुआ। खादर क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान सरसों की फसल को है, जो पूरी तरह नष्ट हो गई है। क्षेत्र के गांव पठेड़, धौलाहेड़ी, गोवर्धनपुर, अहाड़ी, डंडौलीखेड़ा आदि गांवों में भी फसलों को नुकसान हुआ है।
बेहट में बृहस्पतिवार सुबह चार बजे से बारिश शुरू हुई, जो रुक रुककर होती रही। तेज हवा के साथ बारिश और कई स्थानों पर ओलावृष्टि होने से गेहूं व सरसों की फसल को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। घाड़ के नौगांवा, जसमौर, बड़वाला, मिरगपुर पांजूवाला, भागूवाला, नागलमाफी आदि में ओलावृष्टि हुई है। साढ़ौली कदीम में बुधवार रात से बारिश के साथ हवाएं चलने और बृहस्पतिवार को दिन में ओले पड़ने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। साधूराम, प्रेमपाल, शंभूराम काम्बोज, सतीश शर्मा, पद्म प्रकाश, माजिद, हाजी मुकर्रम आदि किसानों का कहना है कि यदि वे गन्ने की पाती जलाते हैं, तो उसका धुआं दिल्ली तक पहुंच जाता है और अब उनकी फसलें बर्बाद हो रही है और शासन में बैठे लोग चुप्पी साधे हैं।
गागलहेड़ी में भी बारिश से गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। निचले इलाके के खेतों में पानी भर गया है। छुटमलपुर क्षेत्र में बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। बेहड़ा संदल सिंह, रामखेड़ी आदि गांवों के किसान अजय राणा, वीरेंद्र सिंह, ठाठ सिंह, कुशलपाल सिंह आदि का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह सर्वे कराकर फसलों के नुकसान का मुआवजा दे।