देवबंद के दोहरे हत्याकांड में हिस्ट्रीशीटर सरफराज और लुकमान सोमवार दोपहर में फिल्मी स्टाइल में दीवानी कचहरी से फरार हुए। जिला कारागार में बंद सरफराज और लुकमान को दोपहर जब पेशी पर लाया गया।
उस समय तक सब कुछ सामान्य था। दोपहर करीब ढाई बजे जब एक ही हथकड़ी में बंधे दोनों बंदियों को कोर्ट से हवालात की ओर ले जाया जा रहा था तो उसी समय फोन पर बात करने के बहाने बंदी सिपाही शीशपाल को स्कूल की ओर वाली दीवार की तरफ ले गए। पुलिस के लालच के फेर में बंदी फरार होने में कामयाब हो गया।
दीवार के पास पहुंचते ही लुकमान ने अचानक पहले से ही पेंट की जेब में रखा मिर्च पाउडर सिपाही की आंखों में डाल दिया। इसके बाद उसने दूसरे आरोपी सरफराज सहित हवालात के बायीं ओर दौड़ लगा दी। सिपाही जब तक संभला तब तक दोनों एक साथ दीवार फांद चुके थे।
सिपाही भी शोर मचाते समय उनके पीछे दौड़ा तो कचहरी परिसर के बराबर स्थित गली में आशा मॉडर्न स्कूल गेट के सामने से होते हुए भागते समय लुकमान ने हथकड़ी से हाथ अलग कर लिया। यहां चूक ये हो गई कि दोनों अलग-अलग दिशा की ओर भाग लिए।
एक हाथ में हथकड़ी लगा सरफराज तो फरार हो जाने में सफल हो गया, जबकि शोर मचाते हुए सिपाही और स्कूल के कुछ बच्चे लुकमान तक पहुंच गए। लुकमान जब एक गली में घुसा तो वह आगे से बंद मिली।
इस पर आरोपी एक मकान में जा घुसा और अंदर से गेट बंद कर लिया। गेट के ऊपर स्थित छज्जे पर चढ़कर फरार होने का प्रयास किया मगर इसी दौरान उसे दबोच लिया गया। इससे पुलिस कर्मियों ने कुछ राहत महसूस की।
लालच और लापरवाही रही जिम्मेदार
बंदियों की फरारी के मामले में कोर्ट परिसर के लोगों और पुलिस के अफसरों के स्तर पर अब तक हुई पड़ताल में पेशी के दौरान लापरवाही बरतने के साथ ही एक सिपाही का लालच और कुछ अन्य कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। फोन करने के बहाने बंदी जब दीवार की ओर जाने लगे तो उनके इरादे खाकी नहीं भांप सकी।
बंदियों के पास कहां से आया मिर्च पाउडर?
कोर्ट परिसर से लेकर पुलिस के आला अफसरों की छानबीन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिपाहियों की आंखों पर फेंका गया मिर्च पाउडर कैदियों के पास आखिर आया कहां से? क्या वे यह मिर्च पाउडर कारागार से ही लेकर आए थे।
यह किसी मुलाकाती से लिया गया? किसी सिपाही की सेटिंग से ही इसकी व्यवस्था की गई या फिर कोर्ट परिसर में ही कैदियों का कोई साथी इस काम में उनके लिए बड़ा मददगार बना? ऐसे ही कई अन्य संभावित बिंदुओं की जांच की जा रही है।
हवालात में दाखिल कराने में देरी क्यों?
कोर्ट परिसर और पुलिस की जांच टीमें इस पहलू पर भी पड़ताल करती रही कि कोर्ट में पेशी संबंधी कार्य लगभग एक डेढ़ बजे तक ही निपटा लिया गया था। इसके बावजूद दोनों कैदियों को सदर हवालात में दाखिल करने में देरी क्यों की गई। सीओ द्वितीय अमित नागर का कहना है कि इस मामले की जांच की जा रही है।
सरफराज के फरार होने अफसरों की टेंशन बढ़ी
पेशी पर लाये गये दो हत्यारोपियों की फरारी की खबर मिलते ही पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया। सीओ द्वितीय अमित नागर थाना सदर पुलिस के साथ पहुंचे।
यहां उन्होंने अदालत परिसर, कैदियों की फरारी में इस्तेमाल दीवार, मिट्टी के ढेर, दीवार के पास मिले मिर्च पाउडर, सदर हवालात, आशा माडर्न स्कूल की ओर जाने वाली गली की बारीकी से जांच करने के साथ ही सिपाहियों से लेकर तमाम अन्य लोगों से जरूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद कार्यवाहक कप्तान जगदीश शर्मा ने भी सभी जरूरी जानकारियां ली। फरार होने में सफल रहे सरफराज ने अफसरों की टेंशन बढ़ा दी है।
पेशी वाला सिपाही हिरासत में लिया, हो सकती है कार्रवाई
सीओ ने बताया कि सिपाही शीशपाल सिंह को फिलहाल हिरासत में ले लिया गया है। उससे पूरी जानकारी ली जा रही है। आला अफसरों का कहना है कि पकड़े गए बंदी लुकमान और पेशी वाले सिपाही शीशपाल के माध्यम से ही पूरे प्रकरण का खुलासा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।