सहारनपुर के शाकंभरी में जसमोर के राशिदा हत्याकांड के आरोपी अंकित की लाश सोमवार दोपहर गांव के पास ही एक आम के बाग में पेड़ से लटकी मिली। लाश को देख परिजन आपा खो बैठे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिल कर पुलिस से लाश को छीन सड़क पर रख दी। इसके बाद वह लाश को लेकर बाग मालिक की हवेली पर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया।
भीड़ ने लाश ले जाने के लिए मंगाए गए टेंपो और बाग मालिक की हवेली में भी तोड़ फोड़ कर दी। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और पीएसी के जवानों ने लाठियां फटकार कर बमुश्किल स्थिति नियंत्रण में की। इसके बाद लाश को उठवा कर पीएम पर भेजा गया। मामले में मृतक के परिजनों ने बाग मालिक सहित राशिदा के परिजनों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।
कोतवाली के क्षेत्र के गांव जसमोर निवासी अंकित (24) पुत्र यशपाल की लाश गांव के पास ही राणा आदित्य प्रताप के सड़क किनारे स्थित आम के बाग में एक पेड़ से लटकी मिली। बाग में घास काटने गए गांव के ही राजपाल व उसकी पत्नी को दुर्गंध आई। उन्होंने इधर उधर देखा तो एक पेड़ पर अंकित की लाश लटकी हुई थी।
लाश की स्थिति से ऐसा लग रहा था कि कई दिन पुरानी है। सूचना मिलने पर पुलिस एवं परिजन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लाश को पेड़ से उतरवाया और पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की तैयारी करने लगे। इस बीच गुस्साई भीड़ ने पुलिस से लाश छीन लिया। भीड़ ने लाश को मिर्जापुर सुंदरपुर रोड पर रखकर हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों का हुजूम देख मौके पर पीएसी एवं अन्य थानों की पुलिस बुला ली गई।
पुलिस ने लाश को रोड से उठाकर अपनी गाड़ी में डालने का प्रयास किया तो भीड़ ने एक बार फिर पुलिस से लाश छीन ली और उसे लेकर बाग मालिक राणा आदित्य प्रताप सिंह की हवेली की तरफ दौड़ पड़ी। पुलिस को भी भीड़ के पीछे दौड़ लगानी पड़ी। भीड़ ने लाश को हवेली के अंदर परिसर में रखकर हंगामा खड़ा कर दिया।
भीड़ का आरोप था, कि अंकित की हत्या में आदित्य प्रताप का हाथ है और उसकी हत्या राशिदा के परिजनों ने की है। अंकित 22 फरवरी की रात में हुए राशिदा के कत्ल के आरोप में नामजद आरोपी था। राशिदा की हत्या के बाद से ही वह गायब चल रहा था।
भीड़ का कहना था कि जब तक राणा आदित्य प्रताप को यहां उनके बीच नहीं लाया जाता तब तक लाश को यहां से नहीं उठाने दिया जाएगा। एसपी देहात विद्या सागर मिश्र ने मौके पर पहुंच कर मृतक के परिजनों एवं ग्रामीणों की भीड़ को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने एक नहीं सुनी।
शाम छह बजे अंकित के पिता यशपाल ने राणा आदित्य प्रताप और राशिदा के पति जब्बार समेत पांच के खिलाफ अंकित की हत्या कर शव को पेड़ से लटकाने का आरोप लगाते हुए तहरीर पुलिस को दी। इसके बाद भीड़ ने पुलिस को लाश को उठाने दिया। उधर, एसपी देहात का कहना है कि तहरीर मिली है। जांच की जा रही है। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। गांव में एहतियात के तौर पर पुलिस एवं पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है।
पुलिस के खिलाफ दिखा आक्रोश
अंकित की लाश मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को भी भीड़ का जबरदस्त आक्रोश झेलना पड़ा। इतना ही नहीं सड़क से लेकर गांव की गली तक पुलिस के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगे। भीड़ का यह गुस्सा पुलिस के खिलाफ यूं ही नहीं था, बल्कि राशिदा हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही को लेकर था। 22 फरवरी की रात जसमोर गांव में राशिदा की धारदार हथियार से गला रेत कर हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में राशिदा के पति जब्बार ने अंकित को नामजद किया था। हत्या के बाद से अंकित का कोई पता नहीं चल पाया था। अंकित का पता लगाने में पुलिस का तंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका था। परिजन शुरू से ही कोतवाली प्रभारी निरीक्षक से आशंका व्यक्त कर रहे थे, कि अंकित की हत्या न कर दी गई हो, लेकिन पुलिस ने उनकी सुनवाई नहीं की।
अंकित के चाचा विक्की ने बताया कि पुलिस ने राशिदा की हत्याकांड की सही इन्वेस्टीगेशन न करके उसके पूरे परिवार को 15 दिन तक लगातार कस्टडी में रखा। उनके जानवर तक भूखे मर गए। घर में चोरी हो गई, लेकिन पुलिस ने उनकी तहरीर तक नहीं ली। अंकित के बाबा रूपचंद का आरोप है कि पुलिस ने अंकित की पत्नी और दो माह की बच्ची को भी नहीं बख्शा। अंकित की पत्नी रचना ने 2 माह पहले ऑपरेशन से बच्ची को जन्म दिया था। वह पुलिस के सामने गिड़ गिड़ाए भी, लेकिन ने उन पर दया नहीं की। भीड़ एवं परिजनों ने इन सभी बातों को उठाते हुए पुलिस को खूब खरी-खोटी सुनाई। अंकित के सभी परिजनों को पुलिस ने आज ही हिरासत से गांव में बुलवाया।