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छेड़छाड़ के दर्द पर समझौते का चाबुक

Thu, 22 Sep 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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परेशानी और लाचारी - फोटो : Demo Pic
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सहारनपुर में छेड़छाड़ की घटनाएं जिले में लगातार हो रहीं हैं। बवाल तक हो चुका है। मगर, पुलिस इन घटनाओं को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है। छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज करने तक में आनाकानी की जाती रही है।
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कायत करने के लिए जाने वाले परिजनों के साथ भी पुलिस का रवैया सही नहीं होता। एक दो नहीं जिले भर में कई घटनाएं ऐसी हुईं हैं, जिनसे माहौल बिगड़ते-बिगड़ते बचा है।

पुलिस की गंभीरता का पता इसी से चलता है कि इस मामले को मारपीट का मामला बताकर आपस में सुलह समझौता कराने का प्रयास करती है। हाल में ही जनकपुरी क्षेत्र का मामला सामने आया, जिसमें छेड़छाड़ की शिकायत करने गईं युवतियों पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया।
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यहां तक कि मामले को मारपीट में तब्दील कर दिया गया और उन पर पूरी तरह से न केवल समझौते का दबाव बनाया गया, बल्कि पुलिस ने एक बार समझौता करा भी दिया। जबकि पीड़िताएं लगातार शिकायतें करती रहीं, उन्होंने कॉलेज तक जाना बंद कर दिया।

उन्हें मोहल्ला तक छोड़ने के बारे में सोचना पड़ा। पुलिस में कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें पीएमओ और लखनऊ में डीजीपी से शिकायत करनी पड़ी। अपनी फजीहत होते देख पुलिस ने छेड़छाड़ करने वालों पर पंजीकृत तो कर लिया, लेकिन पुलिस की किरकिरी होने पर फिर आरोप पीड़िताओं पर ही मढ़ दिया गया। अब पीड़िताएं पुलिस के चक्कर लगा रहीं हैं। 

एक मामला नहीं ऐसे कई मामले हैं जिनमें छेड़छाड़ की पीड़ित छात्राओं के परिजन थाना में शिकायत करने जाते हैं और कार्रवाई करने की बजाय पुलिस उन्हें तमाम सलाह दे डालती है।

नगर कोतवाली क्षेत्र में छेड़छाड़ की एक पीड़िता के पिता ने बताया कि वह अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ कर रहे युवक की शिकायत करने गए तो पुलिस ने समाज में बदनामी का भय दिखाकर, कोर्ट, कचहरी के चक्कर लगाने का डर दिखाकर मामला दर्ज न कराने की सलाह दे दी।

शहर में छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती ही जा रहीं है। गर्ल्स कॉलेजों के आसपास और बाजारों में छात्राओं, युवतियों एवं महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर कई बार हंगामा हो चुका है। महीने में 8-10 मामले दर्ज भी हो रहे हैं।

फिर भी घटनाओं पर अंकुश लगा पाने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है। गांवों में होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर पुलिस का रवैया बेहद ही उदासीनता भरा रहा है। छेड़छाड़ के मामलों को लेकर पुलिस को विश्वास में करके पंचायत करा दी जाती है और वहीं फैसला कराया जाता है।

जबकि शहरी क्षेत्रों में तो कई बार पुलिस की मौजूदगी में ही फैसले करा दिए जाते हैं, जिससे मामले दर्ज न हों। छेड़छाड़ को रोकने के लिए पुलिस को बालिका विद्यालयों के आसपास खड़े होने वाले युवाओं को हटाना चाहिए। छेड़छाड़ करने वाले युवकों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
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