सहारनपुर में हिरनमारान की मिश्रान स्ट्रीट में विवादित दुकान को लेकर दो पक्षों में टकराव हो गया। हाथापाई और मारपीट की वजह से सांप्रदायिक तनाव फैल गया।
सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल के साथ एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, एएसपी, सीओ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। एक बार तो पुलिस के सामने ही दोनों पक्ष भिड़ गए, मगर पुलिस ने मामला शांत कराया।
करीब पांच घंटे चली पंचायत के बाद भी दोनों पक्षों में समझौता नहीं हो सका। एहतियातन मौके पर पुलिस तैनात कर दी गई है। सोमवार की पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे मिश्रान स्ट्रीट में दो फुट में स्थित दुकान पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया।
एक पक्ष के विनीत पुत्र प्रमोद कुमार ने बताया कि उनका परिवार यहां 30 साल से चाय की दुकान चला रहा है। आरोप लगाया कि पप्पू हौजरी वाले ने सोमवार को उनकी दुकान पर पहुंचकर सामान फेंक दिया और दुकान पर ताला डालने का प्रयास किया।
उसे रोका गया तो वह मारपीट पर उतर आया। देखते ही देखते पड़ोसी दुकानदारों की भीड़ जमा हो गई। मामला अलग-अलग संप्रदाय का होने की वजह से किसी ने तुरंत नगर कोतवाली में फोन कर दिया। सूचना मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची।
कुछ ही देर बाद एसपी सिटी संजय सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार गुप्ता, एएसपी सुनीति, सीओ टू अमित नागर मौके पर पहुंच गए। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए शहर के सभी थानों और देहात कोतवाली तक की पुलिस को बुला लिया गया।
पुलिस ने भीड़ को खदेड़ते हुए मामला शांत कराया। दोनों पक्ष अफसरों के समक्ष दुकान पर अपना-अपना दावा जता रहे थे। अफसरों ने मौके पर ही करीब एक घंटा बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनी।
मगर दोनों पक्षों के सहमत नहीं हुए। इसके बाद दोनों पक्षों को नगर कोतवाली में बुला लिरया गया। वहां करीब पांच घंटे चली पंचायत में अफसरों ने मामले को सुलझाने का प्रयास किया, मगर दोनों में से कोई नहीं माना। पप्पू पक्ष ने दुकान पर अपना अधिकार बताया है।
पुलिस ने दोनों पक्षों को नगर कोतवाली में बुलाकर समझाने का प्रयास किया। इस दौरान नगर विधायक राजीव गुंबर, भाजपा नगराध्यक्ष अमित गगनेजा, सपा नेता सरफराज खां, शायान मसूद आदि पहुंचे गए।
इसके अलावा व्यापारी नेता विवेक मनोचा, किशनलाल ठक्कर समेत अनेक व्यापारी नेता भी पहुंचे गए। झगड़े की सूचना मिलने पर हिरनमारान पहुंचे अफसरों ने पाया कि यहां दुकानदारों ने स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण किया हुआ है, जिसकी वजह से सड़क संकुचित हो गई है।
जिस दुकान को लेकर विवाद है। वह भी नाले पर बनी बताई जा रही है। अतिक्रमण को हटवाने के लिए अफसरों ने नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला से फोन पर बात की।
हिरनमारान प्रकरण में अफसरों ने पूरे बाजार में अवैध निर्माण और अतिक्रमण होना पाया है। अब सवाल यह है कि इस अतिक्रमण और अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार कौन है? दरअसल, पूरे बाजार में आज भी अवैध निर्माण जारी है। जिस दुकान को लेकर विवाद हुआ।
उसी के बराबर की दुकान को नाले पर बने होना बताया गया है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि इन दुकानों के नक्शे कौन पास कर रहा है। यदि बिना नक्शे के दुकानें बन रही हैं तो एसडीए ने अभी तक उनको ध्वस्त कराने की पहल क्यों नहीं की। साथ ही यह नाला नगर निगम के अंडर में आता है, जिस पर दुकान को बनने से रोकना नगर निगम की ड्यूटी थी। मगर ऐसा नहीं हो सका।