पहले दबंगई दिखाई, फिर बर्बरता, हत्या, फिर झूठ पर झूठ और फिर समझौते के भरोसे के बाद खुलेआम घूम रहे हैं हत्या के आरोपी पुलिस वाले। किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि हत्या के मामले में वांछित को गिरफ्तार कर सके। करेगा भी कौन जब उसका संरक्षण पुलिस ही कर रही है। पुलिस न सिर्फ उनका संरक्षण कर रही है, बल्कि पीड़ित परिवार को दबाव में लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मामला सरसावा थाना में हुई हिरासत में मौत का है। दस फरवरी की रात को सरसावा के धर्मेंद्र को पहले एक कार्यक्रम से सरेआम उठाया गया, फिर हिरासत में लेकर बर्बरता दिखाई। थर्ड डिग्री से उसकी मौत हो गई। पु
लिस ने हिरासत में मौत के झूठ की ऐसी कहानी रची जिसे कोई हजम नहीं कर पाया। हिरासत में हुई मौत का चुपचाप पोस्टमार्टम करा दिया गया और अपने अनुसार रिपोर्ट भी लगवा ली गई। जब पोस्टमार्टम हो गया तो परिजनों को यह कहकर सूचना दी गई कि एक अज्ञात व्यक्ति का शव पेड़ पर लटका हुआ मिला था, जिसे लोगों ने उनका बेटा बताया है, उसकी जाकर शिनाख्त कर लें।
पुलिस की कहानी को लोग सच भी मान लेते यदि परिजन एक दिन पहले थाना पहुंचकर उसकी जानकारी न लेते। पिता चूहड़ सिंह थाना में बैठे धर्मेंद्र को खाना खिलाकर आया था। पुलिस को अपनी और अपने थानाध्यक्ष संजय पांडेय की दबंगई पर भरोसा था कि कोई उनके सामने कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा सकता।
पुलिस की बनाई कहानी पर सभी विश्वास कर लेंगे लेकिन दलित समाज के लोग एकत्रित हुए और थाना पर बवाल किया तो पुलिस के भी होश उड़ गए। पुलिस ने अपने ही थानाध्यक्ष संजय पांडेय समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और एससी, एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया।
एसएसपी उस समय तो लोगों को शांत करने के लिए संजय पांडेय समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया लेकिन अपना पूरी मशीनरी इस मामले को दबाने में लगा दी। सूत्रों के मुताबिक पीड़ित परिवार पर पहले ही दिन से दबाव बनाया जाने लगा। राजनैतिक दल का एक नेता लगातार उन पर समझौता करने के लिए न सिर्फ दबाव बनाता रहा, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से धमकी भी दिलवाई। सिर्फ नेता ही नहीं, कुछ पुलिस अधिकारी भी पीड़ित के घर पूछताछ और जांच के बहाने पहुंचे और इस मामले में समझौते के लिए हर तरह से प्रयास किए।
पुलिस अधिकारियों को इस बात का पूरा भरोसा हो गया है कि पीड़ित परिवार काफी गरीब है और किसी न किसी तरह से दबाव और लालच में उनके जाल में फंस जाएगा। यही कारण रहा कि 18 दिन बीत जाने के बावजूद सरसावा थाना में हत्या और एससी-एसटी एक्ट के तहत वांछितों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गई।
कार्रवाई करना तो दूर उन्हें पूरा संरक्षण दिया गया। एक ओर तो सरसावा थाना में हत्या के मामले में वांछित हैं, वहीं निलंबित कर उन्हें पुलिस लाइन में भेजा गया है। सभी हत्या के आरोपी पुलिस लाइन में आराम से रह रहे हैं, जबकि परिवार को चलाने वाला एकमात्र आरोपी न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।
पुलिस दे रही है कार्रवाई का आश्वासन
धर्मेंद्र के पिता चूहड़ सिंह का कहना है कि पुलिस कार्रवाई का आश्वासन दे रही है। समझौते के लिए भी उन पर दबाव डाला जा रहा है। इससे परिवार दहशत में है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
एसएसपी लव कुमार का कहना है कि हिरासत में मौत के मामले में अधिकारियों की टीम जांच कर रही है। जांच में आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। फिलहाल आरोपी पुलिसकर्मी निलंबित हैं और पुलिस लाइन में हैं।