सहारनपुर में पक्षपात के लिए बदनाम पूर्व हुकूमतें और एकतरफा कार्रवाई के इतर महंत आदित्यनाथ योगी सरकार कहीं न कहीं निष्पक्षता का संकेत दे रही है। सहारनपुर की सड़क दूधली की ताजा घटना इसका उदाहरण है।
यहां हुए सांप्रदायिक उपद्रव में मुजफ्फरनगर और सहारनपुर दंगों जैसी एकतरफा कार्रवाई की बू नहीं है। यही कारण है कि केन्द्र और प्रदेश में सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसद और विधायकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस पूरी घटनाक्रम से एक बात साफ है कि हाकिमों पर हुकूमत का दबाव नहीं है और अधिकारियों को निष्पक्ष कार्रवाई का संकेत दिया गया है। इस पूरी कवायद से यह स्पष्ट है कि इस सरकार में कानून को हाथ में लेने वाला कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार से मिले संकेत के बाद अधिकारी भी दोषियों को चिन्हित करने में पूूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दे रहे हैं। सड़क दूधली प्रकरण में पुलिस ने शोभायात्रा पर पथराव करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ ही बिना अनुमति शोभायात्रा निकालने और एसएसपी आवास पर उपद्रव मामले में भाजपा सांसद, विधायकों, पूर्व विधायकों, पदाधिकारियों को भी नामजद किया है।
घटना के करीब 24 घंटे बाद दर्ज हुए इन मुकदमों से कानून व्यवस्था पर सरकार का नजरिया भी साफ होता है। बिना किसी दबाव के अधिकारियों ने जिस तरह मुकदमे दर्ज किए हैं, इससे सरकार से मिले संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।
योगी सरकार के गठन के बाद सहारनपुर में प्रदेश का पहला सांप्रदायिक टकराव हुआ तो अधिकारी भी कार्रवाई को लेकर असमंजस में दिखाई दिए। यही कारण है कि बृहस्पतिवार को सांप्रदायिक टकराव के दौरान आलाअफसर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे थे।
मगर, घटना के बाद शुरू हुई पुलिस कार्रवाई में किसी तरह की गुरेज शासन से आए संदेश की झलक दिखा रहा है। पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमों में सांसद राघव लखनपाल शर्मा, देवबंद विधायक ब्रिजेश सिंह, रामपुर मनिहारान विधायक देवेन्द्र निम, गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी, पूर्व विधायक महावीर राणा, राजीव गुंबर, जिलाध्यक्ष बिजेन्द्र कश्यप, नगराध्यक्ष अमित गगनेजा सहित दर्जनों पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
जबकि पूर्व की सरकारों में अब ऐसा नहीं हुआ। आपको बता दें कि वर्ष 2014 में गुरुद्वारा रोड पर हुए सांप्रदायिक उपद्रव से पहले वहां एमएलसी उमर अली खान, पूर्व मंत्री सरफराज खान के बेटे शहनवाज खान, पूर्व विधायक इमरान मसूद कई लोग मौजूद थे।
मगर, पुलिस की एफआईआर में इन्हें आरोपी नहीं बनाया। इसके अलावा पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर दंगों में भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे और पूरी सरकार कटघरे में खड़ी हुई।
मगर, बृहस्पतिवार को हुए सांप्रदायिक टकराव के बाद शुक्रवार को पुलिस कार्रवाई से प्रदेश सरकार के कानून व्यवस्था पर अपने विजन का भी संकेत मिलता है।
कारण, मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगी भी कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत दे चुके हैं और अब भाजपा जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के पीछे प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर संजीदगी का संकेत मिलता है।