सहारनपुर में गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पति को दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। मृतका की ननद और ननदोई के खिलाफ चार्जशीट न आने तथा देवर के खिलाफ सुबूत न मिलने पर उसे बरी कर दिया गया।
कोतवाली सदर बाजार क्षेत्र की सिद्घार्थ एंकलेव कॉलोनी निवासी अमित धीमान ने नौ मई 2013 को हसनपुर चौकी में तहरीर देते हुए बताया था कि उसकी बहन सुनीता की शादी आठ साल पहले गांव मवी खुर्द निवासी विनोद उर्फ कक्कन के साथ हुई थी।
सुनीता छह महीने की गर्भवती थी। सात मई को उसकी बहन ने उसे फोन कर अपने ससुराल वालों से खतरा बताया था। फोन आने के बाद वह अपने चाचा के साथ बहन के घर गया था।
उस दौरान बहन के ससुरालियों को समझा दिया गया था। आरोप है कि नौ मई 2013 को बहन की ससुुराल से फोन आया कि उसकी बहन के कमरे से धुंआ उठ रहा है।
जब अमित बहन के घर पहुंचा तो उसकी बहन की जलकर मौत हो चुकी थी। अमित ने तहरीर में बहन के पति विनोद, देवर विकास, ननद सीमा और ननदोई संजय पर सुनीता को जलाकर मारने का आरोप लगाया था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता जयवीर सिंह पुंडीर ने बताया कि पुलिस ने चारों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। इस मामले की सुनवाई के बाद साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंघल ने पति विनोद को दोषी मानते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास और पांच जार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। यह रकम सुनीता के भाई अमित को दी जाएगी।