बसपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे पन्नालाल कश्यप को सहारनपुर के चिलकाना थाने की पुलिस गाजियाबाद स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर ले आई। उनके खिलाफ 2013 में एक पुलिसकर्मी के साथ प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी करने का मुकदमा दर्ज है। पुलिस ने उन पर पांच हजार रुपये का इनाम की घोषित किया था। चिलकाना थाने में आरोपी को लाने के साथ ही नेताओं का जमावड़ा लगने लगा।
हालांकि शाम तक पुलिस को कागजी कार्रवाई नहीं थी। उधर, आरोपी ने अपने खिलाफ की गई इस कार्रवाई को राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। मूलरूप से शामली निवासी सिपाही रामबीर सिंह कश्यप 2013 में चिलकाना थाने में तैनात थे।
पुलिस ने बताया कि पन्नालाल कश्यप ने उसी वर्ष सिपाही रामबीर सिंह कश्यप को एक लाख 55 हजार रुपये में किसी और का प्लॉट बेच दिया था। जब सिपाही को इसका पता चला तो उसने उनसे रुपये वापस मांगे। आरोप है कि पन्नालाल ने उन्हें 50 हजार रुपये का चेक दिया, जो बाउंस हो गया।
इसके बाद सिपाही को रुपये नहीं दिए गए। बार-बार रुपये मांगने पर भी न मिलने पर सिपाही ने पूर्व मंत्री के खिलाफ धारा 406, 420, 467, 468, 471 मुकदमा दर्ज कराया था। 2014 में आरोपी की कुर्की भी हुई। साथ ही वह उपस्थित भी नहीं हुए। तत्कालीन एसएसपी ने पन्नालाल पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। तब से पुलिस उसकी तलाश में थी।
बृहस्पतिवार की सुबह चिलकाना पुलिस गाजियाबाद स्थित पूर्व मंत्री के आवास पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर चिलकाना ले आई। उधर, पन्नालाल कश्यप का कहना है कि प्लॉट बेचने वाला व्यक्ति दूसरा था। उसने सिपाही के रुपये वापस लौटाने के लिए जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीतिक षड्यंत्र बताया है।
सपा छोड़ते ही गिरफ्तारी हो गई
पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री पन्नालाल कश्यप की गिरफ्तारी सपा को छोड़ने के बाद हुई है। पुलिस की इस कार्रवाई को राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है। कारण, थोड़े दिन पहले ही कश्यप से सपा छोड़ दिया था। हालांकि बसपा शासनकाल में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री पन्नालाल प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद बसपा छोड़ दिया था। इसके बाद वह सपा में शामिल हुआ था।