बदमाशों के खौफ के चलते व्यापारियों के पलायन की एक बड़ी वजह मुकीम काला गैंग ही बना था। साबिर का एनकाउंटर मुकीम काला गैंग की रीढ़ पर पुलिस का प्रहार है। पुलिस की माने तो गत वर्ष पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद साबिर ही गैंग की कमान संभाल रहा था। गैंग की योजना मुकीम काला को भी कस्टडी से फरार कराने की थी।
सहारनपुर के कस्बा गंगोह निवासी मुस्तफा उर्फ कग्गा ने जो गैंग बनाया था, उसमें मुकीम काला, साबिर जंधेड़ी और वाजिद उर्फ काला शामिल थे। 2011 में मुस्तफा उर्फ कग्गा एनकाउंटर में मारा गया, जिसके बाद गैंग की कमान मुकीम उर्फ काला निवासी जहांनपुरा थाना कैराना के हाथ में आ गई थी।
इसके बाद वाजिद उर्फ काला ने अपना रास्ता अलग कर लिया था, जबकि गांव जंधेड़ी निवासी साबिर मुकीम उर्फ काला के साथ ही रहा। मुकीम और साबिर की जोड़ी ने ताबड़तोड़ वारदात की। कैराना में 24 अगस्त 2014 को व्यापारी शिवकुमार और राजेंद्र की सरेेआम हत्या करने के बाद यह मुकीम काला गैंग सुर्खियों में आया।
इस दोहरे हत्याकांड के बाद कैराना सहित पूरे जिले के व्यापारी सड़कों पर आ गए थे और बाद में इस गिरोह का आतंक कैराना पलायन के रूप में आया था। सहारनपुर के तनिष्क शोरूम में करीब दस करोड़ की डकैती सहित कई वारदात को अंजाम देने में मुकीम और साबिर साथ रहे।
इस वारदात में मुकीम से ज्यादा साबिर का दिमाग ही काम करता था। अक्तूबर 2015 में एसटीएफ ने मुकीम और साबिर को गिरफ्तार किया था। मुकीम काला के जेल जाने के बाद गैंग लगभग निष्क्रिय हो चुका था, लेकिन 1 मई 2017 को बाराबंकी में पेशी पर जाते समय पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद मुकीम काला गैंग की कमान साबिर ने संभाल ली थी।
सहारनपुर में भी था साबिर का खौफ
सहारनपुर। शामली में एनकाउंटर में पुलिस द्वारा मारे गए साबिर जंधेड़ी का सहारनपुर में भी खौफ व्याप्त था। सहारनपुर में 2015 में हुई तनिष्क शोरूम में डकैती की घटना को साबिर ने मुकीम काला गैंग के साथ मिलकर अंजाम दिया। जिसके बाद से इस गैंग का खौफ पूरे पश्चिमी यूपी में छाने लगा।
इससे पहले वर्ष 2013 में सर्किट हाउस रोड पर सीओ उमेश कुमार यादव के गनर बागपत निवासी राहुल ढाका की गोली मारकर हत्या कर उसकी कारबाइन लूटने की घटना को मुकीम काला के साथ मिलकर साबिर ने अंजाम दिया। नानौली चेकपोस्ट पर सिपाही को गोली मारकर उसकी रायफल लूटी।
उससे पूर्व मुकीम काला और साबिर ने गैंग के साथ मिलकर 22 सितंबर 2014 को देवबंद में डकैती डाली थी, बिहारीगढ़ के मोहंड चौकी के निकट लूट की घटना को अंजाम दिया। गंगोह में घोड़ा वालों के यहां डकैती, देवबंद के गुर्जरवाड़ा में डकैती, बेहट में लूट समेत एक के बाद एक 14 घटनाओं को अंजाम दे डाला।
सहारनपुर में ही साबिर पर हत्या, लूट, डकैती के 14 मामले दर्ज हैं। लेकिन 2015 में हुई तनिष्क डकैती के बाद से ही यह गैंग पुलिस के निशाने पर आ गया था। पुलिस ने एक के बाद एक करके इस गैंग को नेस्तनाबूत करना शुरू कर दिया था।
चार साल, 17 बदमाश, ताबड़तोड़ वारदात
शामली। मुकीम काला गैंग चार साल के भीतर वेस्ट यूपी में अपराध जगत का सबसे खतरनाक गैंग बनकर उभरा था। इस गिरोह में 17 बदमाश शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश जेल में बंद हैं तो कुछ को ढेर कर दिया गया। इनमें से साबिर ही मुकीम काला का सबसे खास था। जिसे मंगलवार रात गांव जंधेड़ी में मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने मार गिराया।
पुलिस रिकार्ड में दर्ज गिरोह के सदस्यों में मुकीम काला निवासी जहानपुरा, अरशद बाढ़ी माजरा गंगोह, साबिर पुत्र रकम निवासी तिगरी नकुड़, साबिर जंधेड़ी, रिजवान जहानपुरा, वाजिद उर्फ काला, सादर तीतरो, हैदर तीतरो, महताब काना बलवा शामली, नीरज लांक शामली, फरमान भूरा कैराना, आसिफ और मुंशाद खंदरावली, बेशरन व अजरु हाजीपुर गंगोह, बरनावी कैराना निवासी अकबर और हारुन के नाम शामिल है। मुकीम काला गैंग ने वेस्ट यूपी के साथ ही हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान में भी आपराधिक वारदात को अंजाम दिया।
अनिल दुजाना गैंग से खरीदी थी एके 47
अक्तूबर 2015 को जब एसटीएफ ने मुकीम काला और साबिर जंधेड़ी को गिरफ्तार किया, तब खुलासा हुआ था कि मुकीम काला गैंग ने गौतमबुद्धनगर के शातिर बदमाश अनिल दुजाना गैंग से हाथ मिला लिया। उससे एके 47 तक खरीदने की बात कही गई थी। तब मुकीम काला गिरोह आठ लोगों की हत्या करने की फिराक में भी था, जिन पर मुकीम काला को मुखबिरी करने का शक था और रंजिश बनी हुई थी।
साबिर के ठिकाने पर खड़े होते थे लूट के वाहन
पुलिस के अनुसार मुकीम काला गैंग द्वारा लूटे गए वाहनों को मुकीम काला गैंग के अयूब जंग, फिरोज पव्वा के साथ साबिर के ठिकाने पर खड़ा किया जाता था। साबिर के गांव जंधेड़ी में भी कई बार लूटे गए वाहनों को रखा गया। जिन्हें बाद में लूट की घटनाओं में प्रयोग किया जाता था।
रिश्तेदारों के यहां ठहराता था गैंग
पुलिस के अनुसार साबिर अपने गैंग के सदस्यों को घटना करने के बाद अपने खेतों में एवं अपने रिश्तेदारों के यहां ठहराता था। गैंग ने दिल्ली के सीमापुरी में फ्लैट ले रखा था, देहरादून में किराए पर मकान ले रखा था, सहारनपुर के चिलकाना में रुकने का ठिकाना था।
साबिर ने कई बार खेतों में पॉपुलर के पेड़ों पर पन्नी एवं तिरपाल बांधकर एवं ईख में पन्नी बांधकर गैंग के सदस्यों को ठहराया था। फतेहपुर में साबिर की फूफी के यहां भी गैंग कई दिन रुका। देवबंद में भी साबिर का रिश्तेदार है, वहां भी कई बार अपने गैंग केे सदस्यों को रुकवाया गया।