सहारनपुर के बेहट में सरकार चाहे लाख दावे करे कि गर्भवती महिलाओं को कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी लेकिन सरकारी अस्पतालों में कर्मचारी और डॉक्टर अपनी मर्जी से ही काम करते हैं।
ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जिसमें प्रसूता की जान पर बन आई लेकिन जिला महिला अस्पताल में उसे भर्ती नहीं किया गया। उसे कार में ही प्रसव हो गया। महिला के ससुर ने अस्पताल के डाक्टर पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा डीएम से शिकायत की है।
गांव भोजेवाला निवासी रमेश कुमार ने डीएम से की शिकायत में बताया कि उसकी पुत्रवधू नीरज का गर्भवती होने के समय से ही जिला महिला अस्पताल में उपचार चल रहा था।
पांच जनवरी की सुबह करीब नौ बजे पुत्रवधू को प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने पहले 102 पर कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद वे 108 पर कॉल करते रहे, लेकिन वह एंबुलेंस भी नहीं पहुंची। इसके बाद वे पुत्रवधू को पड़ोसी की कार में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने यह कहकर उसकी पुत्रवधू को भर्ती करने से मना कर दिया कि पहले आशा को लेकर आओ। वे शाम चार बजे आशा के पहुंचने तक अस्पताल परिसर में ही रहे।
जब आशा पहुंची तो यह कहकर भर्ती करने से मना कर दिया कि अभी डिलीवरी का वक्त नहीं आया है। 28 तारीख को लेकर आना। जब वे पुत्रवधू को लेकर अस्पताल से घर के लिए चले तो एक किमी चलने के बाद पीड़ा होने पर कार में ही प्रसव हो गया।
वे तुरंत वापस अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि उसके बाद भी उसे भर्ती नहीं किया गया। मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि प्रसूता को भर्ती नहीं किया गया और उसका प्रसव बाहर हुआ है तो मामला गंभीर है। शनिवार को अस्पताल जाकर जानकारी करूंगी। दोषी पर कार्रवाई होगी।
- डा. ममता सोढ़ी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल