एक दर्जन हथियारबंद डकैतों ने ग्राम टपरी में रेलवे स्टेशन के निकट नागल-टपरी मार्ग पर स्थित सराफ और कपड़ा व्यापारी के घर में घुसकर लूटपाट की। डकैतों ने व्यापारी और उसके बच्चों को गन प्वाइंट पर ले लिया और फिर घर, दुकान, लॉकर की चाबी छीनकर लाखों रुपये के आभूषण और नगदी लूट ली। भोर होने से पहले ही डकैत परिजनों को कमरे में बंद करके आराम से दरवाजा खोलकर फरार हो गए।
देहात कोतवाली क्षेत्र के ग्राम टपरी में रेलवे स्टेशन के निकट टपरी नागल रोड पर अनिल कुमार वर्मा की सराफा और कपड़ा की दुकान है। दुकान के ऊपर ही अनिल का आवास है। उसके पास में ही उसके भाइयों के आवास स्थित हैं।
अनिल कुमार के अनुसार रात करीब दो बजे मकान के पीछे पड़े खाली प्लाट के रास्ते से करीब 8 डकैत मकान की छत पर चढ़ गए। उस समय वह और उनकी पत्नी सुमन छत पर सो रहे थे। जबकि, उनकी दो बेटी नेहा, सोनम तथा बेटा शशांक नीचे कमरे में सो रहे थे। डकैतों ने छत पर पहुंचकर सबसे पहले अनिल वर्मा और उनकी पत्नी को जगाया।
उनके जागते ही दोनों को तमंचे से आतंकित कर नीचे कमरे में उतार कर लाए। उनके अनुसार कमरे में करीब 7-8 डकैत एक साथ घुस गए। कमरे में घुसते ही सभी बच्चों को गन प्वाइंट पर ले लिया और एक कपड़े से अनिल कुमार का पूरा मुंह बांध दिया तथा हाथ पीछे बांध दिए।
विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की और मकान, लॉकर की चाबियां ले ली। डकैतों ने अलमारियों को खंगाल डाला और अलमारियों में रखी नगदी तथा सोने, चांदी के आभूषण अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद उनकी बेटियों तथा पत्नी के हाथों एवं गले में पहने आभूषण छीन लिए।
डकैतों ने लाकर की चाबी पूछने के लिए बड़ी बेटी सोनम के नाखून प्लास से खींचने शुरू कर दिए तथा एक नाखून उखाड़ दिया। उंगली को प्लास में दबाकर काटने की धमकी देकर चाबियां ले लीं। विरोध करने पर सोनम की पिटाई कर दी तथा उसके मुंह में तमंचे की नाल डाल कर जान से मारने की धमकी दी। बेटे शशांक को भी पीटा। डकैतों ने 10 लाख से अधिक के आभूषण एवं नगदी लूट ली।
पूरा घर खंगालने के बाद बदमाश करीब साढ़े चार बजे परिवार को एक कमरे में बंद कर घर का नीचे का दरवाजा खोलकर फरार हो गए। उनके जाने के बाद परिजनों ने शोर मचा दिया। जिस पर उनके भाई एवं अन्य लोग एकत्रित हो गए।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि घटना की जांच कराई जा रही है। अपराधियों को पकड़ने के लिए टीम गठित कर दी गई है। शीघ्र ही आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।
डकैतों ने प्लास से व्यापारी की बेटी का नाखून उखाड़ा
टपरी में सराफा और कपड़ा व्यापारी के घर में पड़ी डकैती के दौरान बदमाशों ने परिजनों को जमकर यातनाएं दीं। व्यापारी का मुंह पूरी तरह से कपड़े से बांध दिया, हाथ पैर बांध दिए, बेटी और बेटे के मुंह में पहले तमंचा डाला, फिर कपड़ा ठूंस दिया। तीन घंटे तक डकैत घर को खंगालते रहे और पिटाई करते रहे।
व्यापारी अनिल कुमार के घर में रात के लगभग 2 बजे लगभग 8 डकैत सीधे छत पर पहुंचे। अनिल कुमार के अनुसार कुछ डकैत नीचे ही खड़े हुए थे। छत पर डकैतों ने तमंचा अनिल और उनकी पत्नी सुमन की कनपटी पर लगा दिया और उन्हें मुंह बंद कर चुपचाप नीचे चलने के लिए कहा। घबराए दंपति चुपचाप नीचे आ गए और कमरे का दरवाजा खुलवाया।
दरवाजा खुलते ही डकैतों ने तुरंत दोनों बेटियों को जगा दिया और उनके मुंह में तमंचा डालकर जान से मारने की धमकी दी। डकैतों ने एक बड़े अंगोछे से अनिल का मुंह पूरी तरह से बांध दिया और हाथ पीछे बांधकर बेड पर बैठा दिया। डकैतों ने अनिल के साथ मारपीट की। जब पत्नी ने विरोध किया तो पत्नी सुमन के साथ भी मारपीट की।
इसी बीच उनका बेटा शशांक जाग गया, तो उसकी पिटाई कर दी। उसकी कनपटी पर तमंचा सटाकर कमरों की चाबियां मांगी। लॉकर की चाबी मांगी। बड़ी बेटी सोनम ने विरोध जताया तो उसकी उंगली का एक नाखून प्लास से पकड़ लिया।
उसने चीखना चाहा तो उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। फिर उसका एक नाखून उखाड़ा दिया। इसके बाद प्लास से एक उंगली दबा ली और काटने की धमकी देते हुए अन्य चाबियां मांगीं।
बार-बार डकैत गोली मारने की धमकी देते रहे। पूरा परिवार डरा, सहमा हुआ बेड पर बैठा रहा और डकैत पूरे घर को खंगालते रहे। डकैत तीन घंटे तक घर को खंगालते रहे और परिजनों को यातनाएं देते रहे। बाद में सभी को एक कमरे में बंद करके घर का नीचे का दरवाजा खोलकर आराम से फरार हो गए।
पुलिस की गाड़ी के हूटर सुनते ही शांत रहने की हिदायत दी
व्यापारी अनिल के बेटे शशांक ने बताया कि सामने सड़क से तीन बार पुलिस की गाड़ी हूटर बजाते हुए गुजरी। जब भी पुलिस की गाड़ी का हूटर बजा तो डकैतों ने शांत होने के लिए कह दिया। धमकी दी कि सांस भी निकाली तो गोली मार देंगे। जिससे सभी लोग डर के मारे चुप हो गए। डकैत भी तब तक चुप रहे और कोई हरकत नहीं की।
परिजनों ने बताया कि डकैतों ने मुंह पर कपड़ा लपेट रखा था। सिर्फ आंखें और मुंह खुला हुआ था। सभी युवा नजर आ रहे थे। एक दूसरे को उस्ताद कह कर संबोधित कर रहे थे।