सहारनपुर में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर का शनिवार को एक भड़काऊ वीडियो वायरल हुआ है। फेसबुक पर वायरल वीडियो में चंद्रशेखर ने इस बार 300 बसों के साथ सहारनपुर में कूच करने की चेतावनी दी है।
साथ ही इस बार रोकने या कार्रवाई पर ईंट से ईंट बजाने की चेतावनी दी गई है।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा वाहट्सएप के जरिए भी हिंसा का जवाब हिंसा जैसे मेसेज भेजे जा रहे हैं।
सोशल मीडिया से खड़ा किया संगठन
भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर अपना अलग संगठन खड़ा करना चाहता था। इसी के तहत उसने अपना पूरा अभियान चला रहा था। इसके लिए उसने सोशल मीडिया को माध्यम बनाया और इसी के द्वारा अपना पूरा अभियान चलाया।
न सिर्फ शहर और आसपास के जिलों से, बल्कि पूरे यूपी और आसपास के राज्यों तक से मूवमेंट के लिए समर्थन मांगा। जिससे चंद्रशेखर को बल मिलता चला गया।
चुनावों में बसपा को समर्थन करने के बावजूद भीम आर्मी को गैर राजनीतिक संगठन बताते हुए चंद्रशेखर ने दलितों को अपने साथ जोड़ा। जांच में जुटा खुफिया तंत्र और पुलिस की मानें तो चंद्रशेखर ने सोची समझी रणनीति के तहत बाबा साहेब के नाम पर संगठन को नाम दिया और युवा दलितों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया।
उसने अपनी विशेष संवाद शैली से युवाओं को प्रभावित किया, जिससे युवा दलित संगठन से जुड़ते चले गए। इसके बाद तो फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर एवं अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया।
यही नहीं उसने अपने मूवमेंट की रूपरेखा भी सोशल मीडिया के जरिए तैयार कर लोगों तक पहुंचाई। भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने शब्बीरपुर की घटना के प्रतिकार में दो दिन बाद सोशल मीडिया के जरिये जिले भर से दलित समाज के युवाओं को गांधी पार्क चलने का आह्वान किया।
जब पुलिस ने गांधी पार्क से भीम आर्मी को खदेड़ दिया तो भीम आर्मी ने सोशल मीडिया का पूरा उपयोग किया और सोशल मीडिया के जरिए ही गांव-गांव मेसेज भेजकर युवकों को एकत्रित किया। पूरा आंदोलन सोशल मीडिया के जरिए ही खड़ा किया गया।
उन्हें लगातार व्हाट्सएप और फेसबुक पर निर्देशित किया गया। खुफिया विभाग एवं डीएम-एसएसपी की रिपोर्ट में पूरे प्रकरण में भीम आर्मी को ही जिम्मेदार माना गया। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई।
चंद्रशेखर ने सिर्फ जिले और प्रदेश के ही दलित युवाओं तक ही नहीं बल्कि हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों तक अपना संदेश पहुंचाया और युवा दलितों को संगठन के साथ जोड़कर संगठन को मजबूत करने की कवायद की। सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर के नाम से कई अकाउंट बन चुके हैं और युवा दलितों को लगातार जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।