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असोम में प्रेमिका के घर था फरार बंदी

Mon, 14 Mar 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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Assam was the home of girlfriend escaped prisoner - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में कोर्ट में पेशी के दौरान सिपाहियों की आंखों में मिर्च झोंककर फरार हुए दोहरे हत्याकांड का आरोपी सरफराज असोम में अपनी माशूका के पास रह रहा था। उसका इरादा पुलिस की नजरों से दूर रहकर इस मामले में वादी और गवाहों की मौका पाते ही हत्या करने का था। असोम में उग्रवादी प्रभावित क्षेत्र में रहने के बावजूद उग्रवादियों से किसी भी संपर्क से सरफराज इनकार कर रहा है।
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असोम से सरफराज को ट्रांजिट रिमांड पर लेने के बाद देवबंद पुलिस इस आरोपी को रविवार सदर थाने लेकर पहुंची। यहां थाना सदर और देवबंद पुलिस के अलावा दोपहर में एसएसपी आरपीएस यादव और एसपी सिटी महेंद्र सिंह ने भी उससे करीब एक घंटे तक पूछताछ की।

देवबंद के थीतकी गांव के दोहरे हत्याकांड के आरोपी सरफराज ने बताया कि 22 फरवरी को कोर्ट में पेशी के दौरान सिपाही शीशपाल की मदद से मोबाइल पर परिजनों से बात करने के बाद वह और दूसरा आरोपी लुकमान सिपाही की आंखों में मिर्च डालकर फरार हुए थे। लुकमान को तो पीछा कर दबोच लिया गया था, मगर वह सरफराज हथकड़ी सहित फरार हो गया था।
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इसके बाद देवबंद थाना प्रभारी विजय प्रकाश, वरिष्ठ उपनिरीक्षक संजीव कुमार, संदीप यादव और अमरदीप की टीम को फरार कैदी को पकड़ने में लगाया गया। एक सूचना पर सरफराज को बोडो उग्रवादियों से प्रभावित असम राज्य के जिला कामरूप के थाना बायेहटा के गांव माच में आठ मार्च की रात एक घर से गिरफ्तार किया गया।

वहां की कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर उसे सहारनपुर लाया गया। बांग्लादेश से 22 किलोमीटर दूर गांव में था सरफराज ः पूछताछ में खुलासा हुआ कि बंगलादेश से 22 किलो मीटर दूर ओम के गांव माच में अपनी प्रेमिका सलमा के यहां पहुंच सरफराज ने उसके घर शरण ले रखी थी, जो 25 फरवरी को उसके घर पहुंचा था। सलमा देवबंद के ही गांव थीतकी के रागिब की तलाकशुदा बीवी है। 

सड़क पर फेंकी हथकड़ी नहीं हुई बरामद ः  सरफराज ने एसएसपी को बताया कि लुकमान से हथकड़ी छुड़ाने के बाद भागते समय कुछ आगे जाकर उसने अपने हाथ से भी हथकड़ी छुड़ा ली थी और फिर रिक्शा में जाते समय हथकड़ी को सडक पर ही फेंक दिया था। 

जेल में झाड़ू लगाने से बचने को भी देना होता है चार्ज
सरफराज से बातचीत में एसएसपी तब चौंक गए, जब उसने बताया कि जेल में झाड़ू न लगाने के लिए कुछ पैसे दिए जाते थे। इसके साथ ही मुलाकात करवाने, बैरक बदलने, मोबाइल पर बातचीत से लेकर अन्य सुविधाओं के लिए अलग अलग रेट तय हैं।

सम्मानित हुई पुलिस टीम
एसएसपी आरपीएस यादव ने बताया कि पुलिस अभिरक्षा से पेशी के दौरान कचहरी लाए जाने पर फरार हुए आरोपी सरफराज को गिरफ्तार करने वाली टीम में देवबंद थाने के एसएसआई संजीव कुमार, एसआई संदीप कुमार यादव व कांस्टेबल अमरदीप की मुख्य भूमिका रही, जिन्होंने बोडो उग्रवादियों से प्रभावित क्षेत्र में जाकर सरफराज को जिस निर्भीकता के साथ दबोचा है, उसके लिए पुलिस कर्मी बधाई के पात्र हैं और उनकी और डीआईजी की तरफ से उन्हें सम्मानित करते हुए इनाम एवं प्रशस्ति पत्र भी दिया गया है।
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