सहारनपुर। पुलिस भर्ती परीक्षा में पकड़े गए साल्वर परीक्षार्थियों से चार से छह लाख रुपये में ठेका लेकर परीक्षा साल्व कराते थे। साल्वर को उनके द्वारा हल किए गए प्रश्नों के सही उत्तर के आधार पर भुगतान किया जाता था। मेरठ एसटीएफ आफिस का बाबू कोआर्डिनेट करता था। आधी रकम पेशगी के तौर पर ली गई, जबकि बाकी परीक्षा परिणाम आने के बाद देना तय हआ है।
आरक्षी भर्ती के लिए परीक्षा सोमवार और मंगलवार को 33 केंद्रों पर हुई। सोमवार को आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा बिहार का राहुल दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। मंगलवार को पुलिस ने बड़े नेटवर्क को पर्दाफाश करते हुए 11 लोगों को दबोचा है। डीआईजी शरद सचान के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के सरगना मनीष राणा ने बताया कि पेपर साल्व कराने के लिए चार से छह लाख रुपये में ठेका लेता था। साल्वर को उनके द्वारा परीक्षा में हल किए गए प्रश्नों के आधार पर ही भुगतान किया जाता था। जिसने जितने प्रश्न हल किए, उसे उतने ही पैसे दिए जाते थे। उन्होंने बताया कि परीक्षार्थी से तय रकम की कुछ धनराशि एडवांस के तौर पर ले लेते थे और शेष धनराशि भुगतान के बारे में परीक्षा का परिणाम और भर्ती होने के बाद लेना तय किया जाता था। आरोपियों से बरामद हुई धनराशि परीक्षार्थियों से पेशगी के तौर पर ली गई धनराशि है। जो परीक्षार्थी हैं और जिन लोगों ने धनराशि दी है पुलिस उन लोगों का भी पता लगाकर उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेगी।
सीसीटीवी फुटेज से की जाएगी पहचान
डीआईजी शरद सचान ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है कि किसने किस केंद्र पर परीक्षा दी थी। उस केंद्र के और उस कक्ष के सीसीटीवी की फुटेज कर परीक्षार्थी की पहचान की जाएगी और परीक्षा केंद्र से उस परीक्षार्थी के बारे में पूरी जानकारी लेकर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खोलेगी गैंग का राज
डीआईजी शरद सचान ने बताया कि आरोपियों से 13 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इन मोबाइल फोन से किए गए फोन और उनमें दर्ज कॉल की जांच कराई जाएगी। जिससे गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में पता चल सकेगा। यह भी प्रयास किए जाएंगे कि मोबाइल में कॉल रिकार्डिंग के माध्यम से और भी जानकारी प्राप्त हो जाए।