सहारनपुर। पकड़े गए साल्वर गैंग के सदस्य परीक्षा के दौरान बायोमैट्रिक की काट कोलकाता की एक लैब से सीखकर आए थे। बायोमैट्रिक जांच से बचने को एमसील पर फेविक्विक डालकर असली अभ्यर्थी के अंगूठे का निशान बनाते थे। यही नहीं फर्जी आधार कार्ड बनाने का पूरा खेल बागपत में होता था, जहां पर एक कार्ड की कीमत करीब पांच सौ रुपये बताई गई है। पुलिस पूछताछ में कई अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली है, जिनकी तलाश में कार्रवाई चल रही है।
सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर साल्व करने का ठेका लेने वाले गिरोह के तमाम सदस्य शिक्षित होने के साथ शातिर दिमाग के मालिक हैं। गिरोह का सरगना वैसे तो मनीष राणा है, मगर एसटीएफ में बाबू बिजेन्द्र और फायरमैन दीपक ने भी इस पूरी साजिश में पूरा दिमाग लगाया है। परीक्षा में साल्वर बनकर करोड़ों रुपये कमाने की तैयारी काफी समय से चल रही थी। बाकायदा बायोमैट्रिक की काट के लिए कई सदस्यों को विशेष ट्रेनिंग के लिए कोलकाता भेजा गया था, जहां पर उन्होंने एक लैब में यह ट्रेनिंग ली थी। एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी फर्जी आधार कार्ड बनाने के साथ बायोमैट्रिक जांच से बचने के एमसील पर फेविक्विक डालकर असली अभ्यर्थी के अंगूठे का निशान बनाते थे। एमसील से इसकी लेयर उतारकर टेप से अपने अंगूठे पर चिपकाकर परीक्षा देने पहुंचे थे। वहां बायोमैट्रिक मशीन में अंगूठा मैच कर जाता था। इसलिए यह पकड़ में नहीं आते थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यह तकनीक इन्होंने कलकत्ता की एक लैब से सीखी है। पूछताछ में आया है कि फर्जी आधार कार्ड और परिचय पत्र बनाने का काम बागपत में कराया जाता था। ठेका देेने वाले अभ्यर्थियों से उसका आधार कार्ड तथा पहचान पत्र को स्कैन कराकर उस पर साल्वर अपना फोटो लगा लेते थे। साथ में अपना एक फोटो ले जाते थे, जिससे एग्जामिनेशन हाल में सब कुछ मैच कर सके। साल्वर काफी हद तक अपने मकसद में कामयाब भी रहे। सूत्रों की माने तो आरोपियों ने कई और चौंकाने वाली जानकारियां पुलिस को दी हैं, जिस पर कार्रवाई चल रही है।