सहारनपुर। भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया के भाई सचिन वालिया को गोली लगने से मौत के बाद लगाए गए हत्या के आरोप पर माहौल भांपते हुए डीएम और एसएसपी तुरंत रामनगर पहुंचे और सचिन वालिया के घर पहुंचकर एक-एक कमरे को देखा। उसके बाद गली में खून के धब्बों की तलाश की गई। साथ में गई फोरेंसिक जांच टीम ने भी गली से खून के धब्बे का नमूना लिया।
बुधवार को भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया के भाई सचिन वालिया की मौत होने के बाद जैसे ही गोली मारकर हत्या का आरोप लगना शुरू हुआ तो पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। तुरंत ही पुलिस, आरएएफ और पुलिस अधिकारी रामनगर पहुंच गए। कुछ ही देर में जिलाधिकारी पीके पांडेय और एसएसपी बबलू कुमार भी फोरेंसिक जांच टीम के साथ रामनगर पहुंच गए।
डीएम और एसएसपी टीम के साथ सचिन वालिया के घर पहुंचे। उनके साथ मौजूद टीम ने घर के एक-एक कमरे को खुलवाकर देखा। वहां फोरेंसिक टीम ने भी तलाशी ली, लेकिन वहां विरोध शुरू हो गया। गांव की महिलाओं ने अधिकारियों के सामने ही राजपूत समाज के लोगों और पुलिस अधिकारियों को खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दीं। जिस पर अधिकारी सचिन के घर से निकल कर गली में पहुंचे। सीमेंटेड गली में अधिकारी और फोरेंसिक टीम खून के धब्बे तलाशती रही। कुछ धब्बों को खून के धब्बे मानते हुए फोरेंसिक टीम ने उनके सैंपल भी लिए। अधिकारियों ने माना कि गोली लगने के बाद सचिन गली में पहुंचा था, लेकिन गोली कहां लगी, इसका अधिकारी भी जवाब नहीं दे पाए।
------------
--। डीएम को ज्ञापन देकर रखीं मांगें
भीम आर्मी ने जिलाधिकारी और एसएसपी को जिला अस्पताल में ही ज्ञापन लेने के लिए बुलाया। राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल ने जिलाधिकारी एवं एसएसपी को ज्ञापन सौंपा। जिसमें मांग की गई है कि एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह एवं जयंती की परमिशन लेने वाले पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए, घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए, पीड़ित परिवार को प्रदेश सरकार की ओर से 50 लाख का मुआवजा दिया जाए एवं परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए। रामनगर मार्ग स्थित महाराणा प्रताप के राजपूत भवन को सीज किया जाए।