सहारनपुर। रात में जिला अस्पताल में प्रसूता को लड़का पैदा हुआ, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने सुबह महिला को लड़की थमा दी। बच्चा बदला हुआ देख महिला और उसका पति हैरान रह गया। दंपति ने हंगामा किया तो चिकित्साधिकारी ने उसे जमकर धमकाया तथा उसे अस्पताल से बाहर फेंकने की धमकी दे डाली।
हरदोई के ग्राम ऊसेपुर निवासी गेंदालाल अपनी पत्नी राधिका के साथ ट्रेन से लुधियाना से हरदोई जा रहा था। रास्ते में गर्भवती राधिका को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। असहनीय पीड़ा के चलते गेंदालाल और राधिका रात लगभग 8 बजे सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर उतर गए। गेंदालाल ने रेलवे अधिकारियों को इसकी सूचना दी। रेलवे अधिकारियों के सहयोग से गेंदालाल अपनी पत्नी राधिका को लेकर तुरंत जिला महिला अस्पताल पहुंचा। जहां उसने राधिका को भर्ती करा दिया। रात में राधिका ने बच्चे को जन्म दिया। स्टाफ ने उसे बताया कि उसके लड़का हुआ है। उसके पति गेंदालाल को भी बताया कि उसके लड़का हुआ है। कुछ देर बाद गेंदालाल से कहा कि लड़के के लिए कपड़े लेकर आए। जिस पर वह कपड़े लेने के लिए चला गया। रात में शहर भर में जब कोई दुकान नहीं मिली तो रेलवे स्टेशन पर पड़े सामान को लेने के लिए चला गया।
जब तक वह सामान लेकर पहुंचा तब तक सुबह के 6 बज चुके थे। अस्पताल पहुंचकर उसने कपड़े दिए तो उसे बताया कि उसके लड़की हुई है, लड़की के कपड़े दें। यह सुनकर वह हैरान रह गया। उसने तुरंत अपनी पत्नी राधिका से पूछा तो उसने भी लड़का बताया, लेकिन महिला अस्पताल की नर्सों ने उन्हें लड़की थमा दी और कहा कि उनके लड़की ही हुई है। कोई सुनने में गलतफहमी हो गई होगी। दंपति काफी चीखे चिल्लाए, उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों को कहा कि उन्होंने अपने बच्चे को देखा है। यह उनका बच्चा नहीं है, लेकिन वहां मौजूद नर्सों ने उनकी एक नहीं सुनी। गेंदालाल भागा हुआ महिला चिकित्साधिकारी के पास पहुंचा और पूरी बात बताई। लेकिन उन्होंने भी उसकी बात नहीं सुनी। गेंदालाल ने आरोप लगाया कि उसका बच्चा रात में बदल दिया गया। उसके लड़का हुआ था, दो तीन घंटे बाद ही लड़की बता दिया। अस्पताल के कर्मचारियों ने उनका बच्चा किसी और को दे दिया।
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दंपति को गलतफहमी हुई है
जिला महिला चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर अनीता जोशी का कहना है कि महिला को कोई गलतफहमी हुई है। महिला ने बच्चे की आहार नाल देख ली होगी और उसे लड़का समझ लिया होगा। इस महिला के लड़की पैदा होने तक सभी के लड़की ही हुई थी। इसके बाद ही दूसरी महिला के लड़का पैदा हुआ था। डाक्टर अनीता जोशी का कहना है कि ऐसा कोई मामला नहीं है। उन्होंने सुबह जाकर इस मामले में पूछताछ की। महिला से भी पूछताछ की थी और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की थी। लेकिन सभी यही बता रहे थे कि उन्होंने इसके पास लड़की ही देखी है। इस मामले में चिकित्साधीक्षक डाक्टर अनीता जोशी का कहना है कि डीएनए टेस्ट के लिए कहा गया था। लेकिन उसके लिए महीनों इंतजार करना पड़ेगा। इसलिए मना कर दिया जाएगा।
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रजिस्टर में ही नजर आ गया गोलमाल
सहारनपुर। महिला अस्पताल में भर्ती होने के लिए रखे गए रजिस्टर में भी गड़बड़ी कर दी गई। महिला के कार्ड पर 2127 नंबर पर भर्ती किया गया था। लेकिन उसका नाम दर्ज किया गया 2130 नंबर पर उसका भर्ती समय 8.36 बजे लिखा गया, जबकि 2127 नंबर पर भर्ती महिला का समय काटकर 8.48 बजे कर दिया गया। जबकि वह पहले ही भर्ती हो चुकी थी और उसकी डिलीवरी भी पहले ही हो गई थी। राधिका की डिलीवरी उसके 15 मिनट बाद हुई थी। गेंदालाल ने आरोप लगाया है कि उस महिला से ही उसका बच्चा बदल दिया गया। उसने मांग की थी कि उनका डीएनए टेस्ट कराया जाए। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों और चिकित्सकों ने इंकार कर दिया।
--। पहले भी लगे हैं बच्चे बदले जाने के आरोप
जिला अस्पताल में बच्चों के बदले जाने का आरोप पहली बार नहीं लग रहा हैं। पिछले वर्ष भी बिहार की एक महिला ने बच्चे बदले जाने का आरोप लगाया था। सहारनपुर की ही एक महिला ने भी अस्पताल के स्टाफ पर उनका बच्चो बदले जाने का आरोप लगाया था। उसने बच्चा बेच दिए जाने का आरोप लगाया था। जिसकी आज तक जांच नहीं हो सकी है।
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--। एक महिला का बच्चा ही गायब कर दिया
अक्तूबर में एक महिला के बच्चे को अस्पताल की ही एक नर्स पर उठाकर ले जाने का आरोप लगाया था। लेकिन अस्पताल कर्मचारियों ने ऐसी किसी नर्स के अस्पताल में होने से इंकार कर दिया था। आज तक उस महिला का बच्चा नहीं मिल सका।
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