सहारनपुर के छुटमलपुर में उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने निगम की जमीन कब्जाने के आरोप में कस्बे के रुड़की रोड स्थित 27 लोगों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। निगम अफसरों की इस कार्रवाई से कब्जाधारी दुकानदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
निगम के छुटमलपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक प्रेम सिंह द्वारा फतेहपुर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि घास मंडी तिराहे से रुड़की रोड पर गांधी आश्रम तिराहे तक 27 लोगों ने उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम की जमीन को एक अरसे से कब्जा रखा है। आए दिन ये कब्जाधारी उनकी जमीन में अवैध तरीके से अतिक्रमण करते रहते हैं।
साथ ही रोडवेज की संपत्ति को तोड़ फोड़ कर नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार कब्जाधारी दुकानदारों पर आरोप है कि वे निगम की जमीन को हड़पने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने सरकारी जमीन पर क्रिमिनल ट्रेसपास कर लिया है, जो कानूनन जुर्म है। यदि उन्हें कब्जे के प्रयास से रोका जाता है तो आरोपी लड़ाई झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।
साथ ही जान से मारने की भी धमकी देते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एसडीएम द्वारा भेजी गई राजस्व टीम की पैमाइश में भी उक्त लोगों का अवैध कब्जा पाया गया है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से कब्जाधारी दुकानदारों में हड़कंप मचा हुआ है। उधर, थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने बताया कि 27 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। जांच के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
इनके खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट
सावित्री देवी पत्नी हरपाल सिंह, इरशाद अली पुत्र अब्दुल शमी, सुभाष गोयल पुत्र रामनाथ, नवीन खुराना पुत्र बीएल खुराना, मो. अयूब पुत्र शकूर, प्रवीण कुमार पुत्र उमराव सिंह, हाजी मुजम्मिल पुत्र मकसूद, शोभाराम सैनी पुत्र चंदूलाल, पंकज वर्मा पुत्र ओमप्रकाश वर्मा, सुनील कुमार पुत्र सीताराम, जोगेंद्र साध पुत्र बलधीर सिंह, डा मनोरंजन पाठक पुत्र नरेंद्र सिंह, रामनाथ वर्मा पुत्र रामचंद्र वर्मा, राजपाल पुत्र नामालूम, प्रवीण गुप्ता, अशोक गुप्ता पुत्रगण रामनाथ गुप्ता, संदीप चौहान पुत्र रामपाल, राजबीर सिंह, जियालाल पुत्रगण बूलचंद, सुभाष, धर्मवीर, सुखबीर पुत्रगण सीताराम, पवन, अरविंद पुत्रगण ओमप्रकाश, जिंदा हसन पुत्र अताउल्लाह, लाल सिंह पुत्र आशाराम, सतीश कुमार पुत्र अजीत कुमार।
निगम की इस जमीन पर दो से तीन मंजिला तक बनी हैं इमारतें
रोडवेज डिपो के पूर्वी किनारे पर पांच दशक से भी ज्यादा समय से मार्केट बनी हुई है। इसमें 50 से भी ज्यादा दुकानें हैं। रिहाइशी मकान के साथ ही दो से तीन मंजिला इमारत घास मंडी तिराहे से गांधी आश्रम तिराहे तक बनी है। इन दुकानों के पीछे रोडवेज की डिपो और कार्यशाला स्थित है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक प्रेम सिंह के अनुसार दुकानें निगम की जमीन में बनी है। जो पूर्व में धीरे धीरे करके कब्जा ली गई। करीब छह माह पूर्व निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने अपने अफसरों से सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की थी। इसके बाद शासन स्तर पर कार्रवाई होते हुए एसडीएम बेहट को जमीन की पैमाइश कराने के आदेश हुए। राजस्व टीम ने मौके की पैमाइश करते हुए निगम की जमीन पर अवैध कब्जा होना पाया था। इसी आधार पर अब रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वहीं, यदि जमीन कब्जा मुक्त होती है तो लोगों का करोड़ों रुपये का नुकसान होने के साथ ही सैकड़ों परिवार इससे प्रभावित होंगे।
दुकानदार कोर्ट में देंगे चुनौती
प्रभावित दुकानदारों में सुभाष गोयल, नवीन खुराना, मो. इरशाद, हाजी मुजम्मिल, अशोक गुप्ता आदि का कहना है कि ये सब संपत्ति यहां के पूर्व में जमीदार रहे लोगों से बैनामा करके खरीदी है। उन्होंने ही रोडवेज को भी जमीन दान दी थी। उनकी दुकानें रोडवेज से पहली बनी हैं और यदि यह जमीन रोडवेज की थी तो पहले रोडवेज ने इसे कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रयास क्यों नहीं किया। वे सभी इसको कोर्ट में चुनौती देेंगे।