जांच बदलने के आदेश पर रिपोर्ट तलब
सहारनपुर। पुलिस उप महानिरीक्षक शरद सचान ने बैंक से दो करोड़ रुपये का ऋण न चुकाने के मुकदमे की विवेचना डीआईजी के फर्जी आदेश से बदलने के मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने एक साल पुराने आदेश का रिकार्ड तलब किया है ताकि साफ हो सके कि आदेश जारी हुआ था या नहीं। डीआईजी ने कहा कि यदि जालसाजी हुई तो संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
शहर के हकीकत नगर योगेश शर्मा ने 2014 में सदर कोतवाली में आलोक माहेश्वरी आदि के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा में मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचक ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी जो बाद में वापस हो गई थी। इसी बीच, डीआईजी के आदेश पर विवेचना क्राइम ब्रांच के सुुपुर्द की गई। विवेचक ने दूसरी बार फाइनल रिपोर्ट लगा दी। योगेश शर्मा ने इस मामले में अलग से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर क्राइम ब्रांच प्रभारी समेत दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश हुए थे। एक माह बीतने के बाद भी पुलिस ने अभी तक अभियोग पंजीकृत नहीं हुआ है। योगेश शर्मा का आरोप है कि एक साल पहले डीआईजी के जिस आदेश पर विवेचना स्थानांतरित हुई थी, वह फर्जी था।
इसी प्रकरण में अब डीआईजी शरद सचान ने पूरा रिकार्ड तलब किया है। उन्होंने बताया कि यह आदेश उनके कार्यकाल से पहले का है। उन्होंने पुराना रिकार्ड तलब किया है। यदि आदेश फर्जी मिलता है तो निश्चित रुप से कार्रवाई की जाएगी।