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चोरी की बाइकों के कागजात बनाने वाले तीन गिरफ्तार

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चोरी की बाइकों के कागजात बनाने वाले तीन गिरफ्तार
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सहारनपुर। आरटीओ कंपाउंड में ही समानांतर फर्जी आरटीओ कार्यालय चल रहा था। जहां चोरी के वाहनों के फर्जी आरसी, बीमा के कागज तैयार किए जा रहे थे। मंडी कोतवाली पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी चोरी की बाइकों के फर्जी कागज तैयार कर उन्हें असली बताकर बेचते थे। पुलिस ने चोरी की दो बाइकें, फर्जी कागज तैयार करने के उपकरण और आरटीओ कार्यालय से संबंधित मोहरें बरामद की हैं।
मंडी कोतवाली कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि चोरी की बाइकों के फर्जी कागजात तैयार कर उन्हें बेचा जा रहा है। एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया कि पुलिस ने शुक्रवार शाम को बाइक चोरी करने के आरोप में फैसल निवासी सराय शाहजी थाना मंडी तथा आसिफ निवासी एकता कालोनी को मंडी कोतवाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके कब्जे से चोरी की दो बाइकें बरामद कीं।
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एसपी सिटी के मुताबिक दोनों आरोपियों ने बताया कि वे बाइकें चोरी करते हैं और सदर कोतवाली क्षेत्र के स्टेट बैंक कालोनी निवासी शुभम रस्तोगी उनके फर्जी कागज तैयार करता है। इसके बाद उन बाइकों को अपनी बताकर बेच देते हैं। आरोपियों की निशानदेही पर रात में ही शुभम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की दो बाइकों के अलावा कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, आठ मोहरें, आठ फर्जी आरसी, इंश्योरेंस से जुड़े कागज बरामद किए गए हैं।
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दुकान नंबर 33 में बना रखा था कार्यालय
एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया कि शुभम रस्तोगी ने अपना ऑफिस आरटीओ कंपाउंड में दुकान नंबर 33 में बना रखा था। इसमें कंप्यूटर, स्कैनर, प्रिंटर, इंक पैड और आरटीओ से संबंधित मोहरें रखी हुईं थीं। जहां शुभम चोरी की बाइकों की फर्जी आरसी, बीमा के कागज तैयार करता था। उन्होंने बताया कि शुभम के पिता अजय रस्तोगी की आरटीओ में जान पहचान थी। वह लोगों का काम कराता रहता था। शुभम ने इसका फायदा उठाया। उन्होंने बताया कि शुभम रस्तोगी बाइक चोरी के आरोप में सदर कोतवाली से पहले भी गिरफ्तार हो चुका है।
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10 से 30 हजार रुपये में बेचते थे बाइकें
एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया कि आरोपी बाइकें चोरी करने के बाद उनके फर्जी कागज बनवाकर उन्हें असली बताकर 10 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक में बेच देते थे। इससे उन्हें सीधे तौर पर मोटा मुनाफा हो रहा था। बाइक लेने वाले ग्राहक उनका खेल नहीं समझ पाते थे।
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