सहारनपुर। फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी पर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर असली काम आसानी से करा लेते थे। एटीएस ने आतंकवाद से जुड़े पहलुओं पर भी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जिले में पहले ऐसे फर्जीवाड़े सामने आ चुुके हैं। वर्ष 2008 में पटियाला पुलिस ने पाकिस्तानी नागरिक शाहिद उर्फ इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल को हकीकतनगर से गिरफ्तार किया था। इकबाल भट्टी ने सहारनपुर में आकर फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर ही भारत की नागरिकता प्राप्त कर ली थी। वह कई वर्षों से सहारनपुर में रह रहा था। इस मामले में सरकारी तंत्र की काफी फजीहत हुई थी।
उधर, मंगलवार को देवबंद में एटीएस द्वारा की गई कार्रवाई से ही चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एटीएस ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया। एटीएस ने आरोपियों के पास से फर्जी पते पर बनवाए गए आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड, मूल निवास पहचान पत्र, पासपोर्ट की छायाप्रति सहित तमाम वह दस्तावेज और उपकरण बरामद किए, जिनसे फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराए जा रहे थे। आरोपी काफी समय से फर्जीवाड़ा कर रहे थे। इसकी भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लगी। आरोपी भारी मात्रा में फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर चुके हैं। मामला गंभीर होने के चलते एटीएस ने आतंकवाद से जुड़े पहलुओं पर भी जांच शुरू कर दी है। सूत्र बताते हैं कि इस मामले कई ओर लोगों को भी गिरफ्तारी हो सकती है। एसएसपी बबलू कुमार कहना है कि खुफिया एजेंसियों सहित सभी थानों की पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस सर्च ऑपरेशन चलाएगी।
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स्थानीय स्तर पर थी मजबूत साठगांठ
एटीएस ने खुलासा किया है कि देवबंद में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह का स्थानीय स्तर पर मजबूत गठजोड़ था। पहले ये शपथ पत्र या स्कूल के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर फर्जी पते पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड और मूल निवास आ िअन्य प्रमाण पत्र तैयार करा लेते थे। इसके बाद साठगांठ कर जांच पूरी करा पासपोर्ट बनवा लेते थे। इसके बदले में बांग्लादेशियों से काफी पैसा वसूलते थे। सबसे अहम बात यह है कि इनकी गिरफ्तारी के बाद अब आतंकी कनेक्शन की जांच की जा रही है।