बेटे के नाम से फर्म बनाकर लाखों का गोलमाल
सहारनपुर। शिक्षा विभाग में एक बार फिर बड़े गोलमाल का मामला उजागर हुआ हैं। विभाग में तैनात एक समन्वयक ने अपने बेटे के नाम से एक फर्म बनाकर उसके नाम राष्ट्रीय आविष्कार योजना के तहत आने वाले सामान के खर्च के चेक तैयार करा लिए। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकते हुए ज्यादातर चेकों को कैश भी करा लिया। जबकि किसी भी स्कूल में एक रुपये का सामान नहीं पहुंचाया गया। मामले का खुलासा हुआ तो विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने प्रकरण की जांच बैठाई तो मामला पूरा सामने आ गया। अब समन्वयक पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही हैं।
शिक्षा विभाग के राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत जिले के 24 विद्यालयों का चयन किया गया था। प्रत्येक विद्यालय में 45-45 हजार रुपये कीमत का सामान भेजा जाना था। जिससे बच्चों को छोटे छोटे आविष्कार करना सिखाया जाना था। इसके लिए शासन से बजट भी जारी कर दिया गया था। आरोप है कि संबंधित कार्य के समन्वयक ने इस बजट को ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी कर ली। इस योजना की अधिकांश लोगों को जानकारी न होने का समन्वयक ने फायदा उठाते हुए अपने बेटे के नाम एक फर्म तैयार की। वेदांत इंटरप्राइजेज नाम की इस फर्म के लिए ज्यादातर स्कूलों से चेक तक ले लिए और सामान भेजने का आश्वासन दे दिया, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी विद्यालयों में कोई सामान नहीं भिजवाया गया। खातों से रकम निकलने और स्कूलों में सामान न पहुंचने पर कुछ प्रधानाध्यापकों ने मामले की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की। बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से प्रकरण की जांच बैठायी गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विभाग की ओर से अब दोषी समन्वयक के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
- राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत चयनित विद्यालय : 24
- प्रत्येक विद्यालयों को आवंटित धनराशि: 24,000
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इन सामान को पहुंचाने के लिए आवंटित हुई धनराशि
- मछलियां
- सूक्ष्मदर्शी
- बड़ी मेज
- रैक
- अलमारी
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समन्वयक की भूमिका संदिग्ध, कार्रवाई की तैयारी
- राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में विभाग की एक समन्वय की भूमिका संदिग्ध रही है। विभागीय जांच में भी इसका खुलासा हो चुका है। उसके विरुद्घ कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
रामेंद्र सिंह, बीएसए