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मुंबई से लेकर आते थे क्लोन चेक

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मुंबई से लेकर आते थे क्लोन चेक
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सहारनपुर। भूमि अध्याप्ति अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर फर्जी चेक से चार करोड़ रुपये से अधिक के गबन के मामले में पुलिस ने जो खुलासा किया। उससे अधिकारी भी हैरान रह गए। फर्जी चेकों को लेकर फ्लाइट से एक व्यक्ति दिल्ली पहुंचता था। फिर दिल्ली से दूसरा व्यक्ति कमीशन के पैसे और चेक लेकर मुजफ्फरनगर एवं सहारनपुर आता था। पूरा नेटवर्क काम कर रहा था। रैकेट में एक दर्जन से भी अधिक लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
एसएसपी बबलू कुमार ने गबन का खुलासा करते हुए बताया कि एक दर्जन से अधिक लोगों का रैकेट काम कर रहा था। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार किए गए मासूम अली उर्फ अनवर अली ने बताया कि उनके द्वारा एक गिरोह बनाया गया है जिसका सरगना ओमप्रकाश श्रीवास्तव एवं सुनील सोनी है। जो उन्हें फर्जी चेक एवं कागजात तैयार कराके देते थे। उसने बताया कि उसने इंडसइंड बैंक में अपना खाता खुलवाया एवं बैंक के कस्टमर सर्विस मैनेजर गौरव गर्ग से दोस्ती की।
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एक दिन उसने गौरव गर्ग को गबन को लेकर पूरी योजना बताई। जिसके लिए गौरव गर्ग तैयार हो गया एवं उसने ही बताया की भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग के खाते में करोड़ों रुपये पड़े हैं। इसके बाद उसने 11 नवंबर 2017 को ओमप्रकाश श्रीवास्तव एवं उसके साथी पारस मकवाना को मुंबई से गौरव गर्ग से मिलवाने के लिये उसके घर मीरापुर बुलवाया। जहां बैठक के बाद पूरी रूपरेखा तैयार की गई। सभी को अपना-अपना कार्य समझाया गया। उसके कुछ दिन बाद गौरव गर्ग ने बैंक से भूमि अध्यापित अधिकारी सहारनपुर की चेकबुक, पत्र तथा डाक बही का नूमना की फोटो स्टेट एवं फोटो करके उसे दे दी। जिसे उसने ओमप्रकाश श्रीवास्तव को दे दिया। ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने उसकी हूबहू कापी तैयार किया। एक व्यक्ति फ्लाइट से ही क्लोन चेक एवं अन्य कागज लेकर मुंबई से दिल्ली पहुंचा। उसने उसे चेक एवं अन्य कागज दिए। जिसे उसने अलग-अलग तारीखों में सलमान, आसिफ एवं इस्लामुद्दीन को साथ लेकर बैंकों में पहुंचा और वहां सभी चेक खातों में लगा दिए। ये सभी फर्जी चेक बिना किसी दिक्कत के पास हो गए।
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हवाला की तरह होता था लेनदेन, कोड से होता था भुगतान
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि रैकेट द्वारा पैसे का ट्रांजेक्शन हवाला की तरह ही किया जाता था। खाते भी फर्जी आईडी से खुलवाए गए। आरोपियों के पास से फर्जी पेन कार्ड एवं आईडी बरामद हुईं हैं। फर्जी खाते खुलवाकर उनसे ही पैसे इधर से उधर कराते रहे। साथ ही नगद भुगतान के लिए एक कोड दे दिया जाता था। जो व्यक्ति फ्लाइट से मुंबई से दिल्ली आता था, वह एक कोड नंबर लेकर आता था। यहां आकर वह मासूम अली उफ अनवर अली को देता था। जो बताए हुए व्यक्ति के पास जाकर उसे कोड नंबर देता था और वहां से पैसे लेकर कमीशन गौरव गर्ग एवं अन्य लोगों को दे देता था।
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--। सभी के नाम फर्जी पाए
जिन नामों के खाते खुलवाए गए हैं और जिनसे पैसा ट्रांसफर किया गया है, वे सभी खाते फर्जी नामों से खुलवाए गए हैं। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि सभी आरोपी एक दूसरे को फर्जी नाम से ही पहचानते एवं बात करते थे। ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने भी अपना नाम अजय बताया था। जिन लोगों के खाते हैं उस नाम के व्यक्ति हैं भी या नहीं इसकी भी जांच कराई जा रही है।
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पहले भी जेल जा चुका है ओमप्रकाश
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि मुंबई से गिरफ्तार किया गए मुख्य रूप से बनारस केेेे रहने वाले ओमप्रकाश श्रीवास्तव पर गबन के पहले भी आरोप लगे हैं। थाना कुलावा महाराष्ट्र से ही गबन के मामले में वर्ष 2016 में जेल भेजा गया था। जेल से आते ही फिर फ्रॉड करने में लग गया।
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--। टीम को पुरस्कृत किए जाने की घोषणा
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि गबन के मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम को डीआईजी की ओर से पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की गई है। टीम में सदर कोतवाली प्रभारी यज्ञदत्त शर्मा, सर्विलांस सेल प्रभारी मुबारिक हसन, उप निरीक्षक संजीव भटनागर, कांस्टेबल विनीत हुड्डा, विपिन कौशिक, तरूण शर्मा, अंकुर चौहान, मनोज चौहान, विनीत तोमर, सुमित कुमार, सुमित शर्मा शामिल हैं।
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