छुटमलपुर (सहारनपुर)। कानून को ताक पर रख कर फैसले देने वाली पंचायतें पुलिस के लिए चुनौती बन रही हैं। पुलिस का खुफिया तंत्र विफल होने, थाने पहुंचने पर फरियादी को तवज्जो न मिलने और न्याय पाने के लिए थाने और अस्पतालों में खर्च होने वाली रकम को वहन न कर पाने की मजबूरी में लोग ऐसी पंचायतों के चंगुल में फंस जाते हैं। इन पंचायतों में प्रभावशाली लोग फैसले दे कर पूरे समाज को शर्मसार करते हैं।
सुंदरपुर में छेड़छाड़ के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। यहां महिला छेड़छाड़ की शिकायत लेकर थाने गई थी, लेकिन आरोप है कि उसकी सुनवाई नहीं हुई। उसे वहां से टरका दिया गया। इसके बाद उसने मामला गांव में जिम्मेदार कहे जाने वाले लोगों के सामने उठाया तो उन्होंने पंचायत बुला ली। पंचायत में कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई र्गइं और आरोपी साजिद के साथ अमानवीय हरकत की गई। इतना कुछ होने के बाद साजिद थाने जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। वजह वही पुलिस का ज्यादातर मामलों में पीड़ित के प्रति टालू रवैया। उसने पंचायत का फैसला मानते हुए गांव छोड़ने में ही भलाई समझी। चार मार्च को सहारनपुर की इंदिरा कालोनी में भी ऐसी ही पंचायत हुई थी जिसमें पीड़ित युवक के साथ मारपीट के साथ की उसके ऊपर मानव मूत्र तक फेंका गया था। इस घटना से आहत युवक ने जहर खा लिया था। खास बात यह है कि पुलिस का चौकीदारों और मुखबिरों का तंत्र भी विफल साबित हो रहा है। दोनों ही घटनाओं में वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस नींद से जागी और कार्रवाई की। इस तरह की पंचायतों के चंगुल में लोग न फंसे इसके लिए पुलिस को संवेदनशील हो कर पीड़ितों की सुननी होगी।