पशु वधशालाओं का निरीक्षण, बंद करने के आदेश
गंगोह (सहारनपुर)। पशु चिकित्साधिकारी के पिछले तीन दिन से लापता होने और कांवड़ यात्रा के मद्देनजर मंगलवार देर शाम एसडीएम ने कोतवाली पुलिस के साथ नगर पालिका और जिला पंचायत द्वारा संचालित पशु वधशालाओं स्थल पर पहुंच उन्हें बंद करने के आदेश संचालकों को दिए।
मंगलवार शाम करीब सात बजे एसडीएम डीपी सिंह और कोतवाली प्रभारी आरके सिंह पुलिस फोर्स के साथ पशु वधशालाओं पर पहुंचे। यहां उन्होंने दोनों स्लाटर हाउसों का निरीक्षण किया। उन्होंने बिना पशु चिकित्साधिकारी की मौजूदगी में पशु कटान होने पर आश्चर्य जताते हुए नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद संचालकों को पशु वधशालाओं को बंद करने के निर्देश देकर अधिकारी वापस लौट आए। उधर भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिस समय अधिकारी पशु वधशालाओं में पहुंचे। उस समय वहां पोस्ट मार्टम के लिए चिकित्सक मौजूद नहीं था। साथ ही वहां छोटी उम्र के पशुओं को लाकर उनके कटान की तैयारी चल रही थी। बिना चिकित्सक के कटान के बारे पूछे जाने पर संचालक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। उधर कांवड़ यात्रा को लेकर भी इनको बंद करने की मांग की जा रही थी। उधर एसडीएम डीपी सिंह ने छोटे पशुओं की बरामदगी की बात सिरे से नकारी है। उनका कहना था कि पशु चिकित्सक मौजूद नहीं थे जिस कारण पशु वधशाला बंद करा दी गई है।
इन्सेट के लिए प्रस्तावित
प्रशासन की मिली भगत से हो रहा अवैध कटान
गंगोह की पशु वधशालाएं नियम कायदों को ताक पर रखकर चलाई जा रही है। एक ओर पशु चिकित्साधिकारी लापता है। जबकि उसकी गैर मौजूदगी में ही बडी मात्रा में अवैध रूप से छोटी उम्र के पशुओं का भी कटान किया जा रहा है। गत माह 23 जून को भी मानकों के पूरा ना होने के चलते नगरपालिका द्वारा संचालित स्लाटर हाउस पर सील लगाई गई थी। मगर कुछ दिन बाद ही पूर्व की भांति सील पुन: खोल दी गई। इससे जहां नागरिक प्रशासन की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं वहीं क्षेत्र के नागरिकों को भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।