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17.29 करोड़ के जाली नोट: एसबीआई करेंसी चेस्ट के जरिए आरबीआई जयपुर को भेजे थे 111 करोड़; ये है अब तक की जांच

Fri, 04 Sep 2026 11:11 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

Saharanpur News: पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जाली नोट मामले में पुलिस के साथ ही एजेंसी जांच कर रही है। पता चला है कि छह जुलाई 2026 को जयपुर करेंसी भेजी गई थी। जाली नोट मामले में शामिल एक आरोपी विशाल को इन नोटों की गिनती करने के लिए लगाया गया था।
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सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में जांच करने पहुंचे मुख्य सुरक्षा अधिकारी। बाहर खड़ी उनकी गाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के जाली नोट मामले की जांच में एनआईए, एसआईटी, आरबीआई और पीएनबी की टीम जुटी हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि छह जुलाई 2026 को 111 करोड़ रुपये पीएनबी ने एसबीआई करेंसी चेस्ट के जरिए आरबीआई जयपुर को भेजे थे। इसमें 500 के 1900 और 200 के 800 बंडल मौजूद थे। ये सभी नोट गंदे व जीर्ण थे।
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किसी करेंसी चेस्ट में प्राप्त गंदे और जीर्ण मुद्रा नोटों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत छांटा, गिना और बंडल बनाया जाता है। इसके बाद ही इन्हें संबंधित आरबीआई कार्यालय भेजा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत 111 करोड़ की राशि के गंदे-जीर्ण मुद्रा नोट तैयार किए गए थे। इनमें 500 के 1900 और 200 के 800 बंडल शामिल थे। यानी बंडल में 500 के 19 लाख और 200 के आठ लाख नोटों की खेप थी। इन नोटों को छह जुलाई को पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से एसबीआई करेंसी चेस्ट भेजा गया। इसी के जरिए आरबीआई जयपुर भेजे गए थे।
 

किस अधिकारी के आदेश पर विशाल को लगाया
आरोपी विशाल कुमार को गंदे और जीर्ण मुद्रा नोटों के बंडल तैयार करने के कार्य में लगाया गया था। यह जांच का विषय है कि उसे किस अधिकारी के आदेश पर लगाया गया था। इसके अलावा सवाल यह भी है कि करेंसी की गिनती, पैकिंग, सीलिंग, डिस्पैच और बंडलिंग की प्रक्रिया में किन-किन कर्मचारियों की ड्यूटी लगी थी। उनके पास किस स्तर पर अधिकृत जिम्मेदारी थी।
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जांच के लिए इकट्ठा किए जा रहे दस्तावेज
एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि पुलिस की तीन बिंदुओं पर जांच चल रही है। इसमें डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज इकट्ठा करना और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश शामिल है। आरोपी अभी नहीं पकड़े गए हैं। आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस व इनाम घोषित करने की प्रक्रिया है, जिसके तहत उसे अपनाया जाएगा। अब तक की जांच में नेपाल का कनेक्शन सामने नहीं आया है।

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