सहारनपुर। पीएनबी की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की नजर अब मेरठ में एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट से मिले जाली नोटों पर भी है। मेरठ में करीब 4.63 लाख रुपये की जाली करेंसी मिलने के बाद एनआईए सहारनपुर प्रकरण की जांच के साथ इस मामले के संभावित कनेक्शन को भी खंगाल रही है। इसमें जाली नोटों की गुणवत्ता से लेकर उनके डिजाइन आदि का मिलान किया जाएगा।
सहारनपुर में सामने आए 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में एनआईए अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में बैंक की करेंसी चेस्ट, उसमें आने वाली नकदी, नकदी की छंटाई और आगे भेजी जाने वाली रकम से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। इसके बावजूद अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे और इनका मूल स्रोत क्या था।
इसी बीच मेरठ में एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने से जांच एजेंसी के सामने एक नया सिरा आया है। बताया जा रहा है कि एनआईए अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेरठ में मिले नोटों का स्रोत क्या है और क्या उनकी सप्लाई चेन कहीं सहारनपुर प्रकरण से जुड़ती है। इसके लिए दोनों मामलों में मिले नोटों की सीरीज, गुणवत्ता, डिजाइन, बरामदगी का तरीका और करेंसी चेस्ट तक पहुंचने के रास्ते जैसे बिंदु महत्वपूर्ण खंगाले जा रहे हैं।
दो करेंसी चेस्ट, एक बड़ा सवाल
सहारनपुर और मेरठ दोनों ही मामलों में जाली नोटों का करेंसी चेस्ट तक पहुंचना जांच का सबसे अहम पहलू बन गया है। यदि दोनों मामलों में नोटों की सीरीज या उनके बैंकिंग चैनल में आने के तरीके में समानता मिलती है तो जांच को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय किसी बड़े नेटवर्क की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। एनआईए के लिए मेरठ का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सहारनपुर प्रकरण में अभी सबसे बड़ा सवाल अनसुलझा है कि करोड़ों रुपये की जाली करेंसी बैंकिंग सिस्टम में दाखिल कैसे हुई।