रात के अंधेरे में चैन की नींद सो रही दो बहनों और एक भाई पर छत का मलबा मौत बनकर गिरा। दबे पांव आई मौत ने बच्चों को बचने का मौका तक नहीं दिया। परिवार की चीख-पुकार सुनकर पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे, जिन्होंने दो बहनों को बचा लिया। दोनों अस्पताल में भर्ती है, उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उधर, हादसे के बाद रात भर मानकमऊ क्षेत्र परिजनों की चीत्कारों से गूंजता रहा।
सब्जी विक्रेता इसरार के दस बच्चे हैं, जिनमें से दो लड़कियों इमराना और इसराना का निकाह कर चुके हैं, जबकि बड़ा बेटा इमरान बाहर रहता है। वर्तमान में वह पत्नी सगीरन और सात बच्चों के साथ रह रहे थे। शुक्रवार की रात पूरा परिवार चैन की नींद सो रहा था। किसी को क्या पता कि रात में शुरू हुई आंधी और बारिश परिवार की खुशियां छीन लेगी।
छत के मलबे के रूप में आई मौत ने इसरार के तीन बच्चों फरहाना, रहमान और सायमा की जिंदगी छिन ली। गनीमत यह रही कि शोर सुनकर आए पड़ोसियों ने तत्परता दिखाते हुए रात के अंधेरे में ही मलबा हटाया दिया। बच्चों के ऊपर भारी गार्डर, बल्लियां, ईंटें और मिट्टी पड़ी हुई थी। भाई-बहनों के साथ सोए गुलिस्तां और आमना अस्पताल में भर्ती है। उनकी हालत भी नाजुक बनी हुई है।
सूचना मिलते ही डीएम पवन कुमार, एसएसपी प्रदीप कुमार यादव के अलावा कांग्रेस नेता इमरान मसूद, सपा नेता शायान मसूद, सपा जिलाध्यक्ष मजाहिर हसन मुखिया आदि नेताओं और आम लोगों का जमावड़ा अस्पताल में लग गया। लोगों ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। उधर, परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां सगीरन तो कई बार बेहोश हुई, जिसे मोहल्ले की महिलाओं ने कई बार संभाला। अन्य बच्चे भी भाई-बहनों की मौत के बाद गुमसुम थे।
रंग-बिरंगे कपड़ों की जगह लाने पड़े कफन
सहारनपुर। मानकमऊ में मकान की छत के मलबे में दबकर मारी गई दो बहनों और एक भाई ने नोएडा में फायर ब्रिगेड में तैनात अपने बड़े भाई से ईद पर रंग-बिरंगे कपड़े लाने को कहा था। मगर उस भाई को क्या पता था कि वह उनके लिए सुंदर कपड़ों की जगह कफन लेकर पहुंचेगा।
शुक्रवार की रात करीब साढ़े 11 बजे तूफान और बारिश में गिरी मकान की छत के नीचे दबकर मारी गई फरहाना (18), सायमा (11) और रहमान (12) का बड़ा भाई इमरान दिल्ली में फायर ब्रिगेड में तैनात है। पिछले दिनों जब वह घर पर आया था तो छोटे भाई-बहनों ने उससे ईद पर सुंदर कपड़े और मिठाई लेकर आने को कहा था। घर में भी ईद की तैयारियां चल रही थीं।
मगर यह किसी को नहीं पता था कि ईद की खुशियां से पहले परिवार पर मुसीबत का इतना बड़ा पहाड़ टूट पड़ेगा। जो भाई छोटी बहनों और भाई के लिए कपड़े खरीदने में मशगूल था। उसे सुंदर कपड़ों की जगह अचानक ही कफन खरीदने पड़ गए। जैसे ही इमरान को घटना की सूचना लगी तो वह तुरंत सहारनपुर के लिए रवाना हो गया। यहां पहुंचते ही पिता और मां के साथ ही छोटे भाई और बहनें उससे लिपटकर रोने लगे। ऐसे में वह भी अपने आंसुओं को थाम नहीं सका। यह दृश्य देख हर किसी की आंख नम थी।