राम की लीला पर कोरोना की मार, रोजगार छीना
सहारनपुर। कोरोना की वजह से इस बार शहर में रामलीला का मंचन अन्य सालों की अपेक्षा कम जगहों पर हो रहा है। जिसकी वजह से लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है।
महानगर में 17 जगहों पर रामलीलाओं का मंचन होता था। इनमें प्रमुख प्राचीन रामलीला कमेटी के तत्वावधान में कोरोना को देखते हुए इस बार बेहट बस अड्डे की जगह रामलीला भवन में सूक्ष्म लीला आयोजित की जा रही है। हर वर्ष रोज श्रीराम, लक्ष्मण और रावण की हाथी सवारी बैंडबाजों के साथ निकलती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहंी हो रहा है। राम बारात और अन्य मुख्य लीलाओं पर शोभा यात्रा निकलती थी। लेकिन इस बार सब गौण है, जिस वजह से बैंडकर्मियों, लाइटिंग और मंच की सजावट करने वालों का काम प्रभावित हुआ है। शहर की सबसे बड़ी रामलीला में 25 से 30 लाख रुपये खर्च होता था। कमेटी के मंत्री चौधरी माई दयाल सिंह मित्तल ने बताया कि कोरोना के चलते इस बार बड़े कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए हैं। भारतीय कला संगम रामलीला के अध्यक्ष अशोक छाबड़ा, भारतीय कला मंच के महामंत्री वरुण शर्मा, आशुतोष मंदिर क्लब के प्रधान गौरव चौधरी, उत्तर रेलवे नाटक क्लब के प्रधान रवि जुनेजा ने बताया कि प्रमुख लीलाओं पर जुलूस निकालकर भंडारे आयोजित किए जाते थे। पहले से बैंडबाजे, आतिशबाजी, घोड़े, मंच की सजावट, हलवाईयों की बुकिंग होती थी, लेकिन इस बार कोई आयोजन नहीं हो सका। सामान्य रामलीलाओं में 12 से 15 लाख रुपये खर्च होते थे। इनके अलावा कोरोना की वजह से जुबली पार्क, हकीकतनगर, खलासी लाइन, लेबर कॉलोनी, नुमाइशकैंप, ब्रह्मपुरी कॉलोनी, पेपर मिल रोड, खानआलपुरा के तकिया सहित 17 जगहों पर रामलीलाओं का आयोजन नहीं हो सका।