जिस वीरभूमि ने 1857 की क्रांति में पहली आहुति दी थी, उस वीर भूमि में अब पानी जहर बनने लगा है। यह बात खुद जिला प्रशासन ने भी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में दिए हलफनामे में स्वीकार कर ली है।
दूषित पानी की वजह से शहर से महज 20 किमी दूर अलग-अलग इलाकों में दर्जनों नहीं, सैकड़ों लोग इसके शिकार हैं। इंसान नहीं, जानवरों तक का अस्तित्व खतरे में है। हालत यह हो गई है कि दर्जनों गांवों में अब रिश्ता करने से भी लोग कतराने लगे हैं। घरों में किलकारियां नहीं गूंज रहीं। महिलाएं, बच्चे, बूढ़े सबकी चमड़ी में रोग सेंध मार रहे हैं। अफसोस, हुकूमत सो रही है और जनता का दुख-दर्द बांटने को भेजी उसके नुमाइंदों की फौज भी।
यदि जल्द ही इस खतरे पर नियंत्रण नहीं किया गया तो न जाने कितने लोगों की जिंदगी कैंसर की चपेट में होगी। विडंबना तो यह है कि जिस कारण यह खतरा बढ़ रहा है। उसका सच कई बार सामने आ चुका है। सर्वे उजागर कर चुके हैं कि दूषित पानी की वजह से यह बीमारी दिन-ब-दिन पांव पसार रही है। अधिकारी भी इस बात को जानते हैँ। पिछले दिनों डीएम ने एनजीटी में सहारनुपर के पानी को पीने योग्य नहीं माना था। इससे साफ है कि अधिकारियों को दूषित पानी का सच पता था, मगर कागजी खेल में अब तक इसे छिपाया गया।
शहर चारों तरफ अलग-अलग तहसीलों में गांव के गांव बीमार हैं। शासन-प्रशासन ने रोकथाम के इंतजाम तक नहीं किए। इर साल अनेक लोग बीमारियों से मर रहे हैं। परिजन और रिश्तेदार उनको बीमारी के बारे में नहीं बताते। कैंसर और बीमारियों से प्रभावित गांव के लोग दबी जुबान से कहते हैं कि बीमारी का नाम सुनकर कोई रिश्ता करने को तैयार नहीं है। कहीं हिंडन का प्रदूषण है तो कहीं फैक्ट्रियों के दूषित जल से कैंसर कहर बरपा रहा है। मौतों के बाद हो-हल्ला मचने पर अफसर गांव आते हैं, सवाल करते हैं, जांच करते हैं और चुपचाप लौट जाते हैं, कोई करता कुछ नहीं, सरकारी मशीनरी के इस खिलवाड़ पर हजारों लोग गुस्से में हैं।
हर तरफ बढ़ रहा है कैंसर का प्रकोप
कुछ साल पहले हिंडन किनारे बसे गांवों में कैंसर का प्रकोप फैला। तब यह माना गया कि हिंडन के प्रदूषण के चलते बड़गांव क्षेत्र के कई गांव कैंसर की चपेट में आए थे। मगर, रामपुर मनिहारान, गागलहेड़ी, गंगोह, अंबेहटा सहित कई दूसरे इलाके भी हैं, जहां गांव-गांव के गांव बीमार पड़े हैं। तमाम सर्वे और जांच में यह बात सामने आई कि लगातार जहरीली हो रही हवा-पानी की वजह से यह बीमारी पांव पसारती जा रही हैं।
इन गांवों में हैं कैंसर का कहर
शिमलाना, महेशपुर, तावतखेड़ी, सब्बीरपुर, चिराऊं, बहेढ़ा, कुतबा माजरा, बड़गांव, सुखेड़ी, धानवा हरोड़ा, नंदी फिरोजपुर, जैनपुर, साढ़ौली हरिया, बहादरपुर, शकतपुर, ताशीपुर, नैनसोब, अहमदपुर, हलगोवा, शीतलाखेड़ा, भगवानपुर, भनेड़ा खेमचंद, परागपुर, ढायकी, रामसहायवाला, नवाजपुर, शंभुगढ़। हर गांव में कैंसर से दर्जनों बीमार हैं। इसके अलावा कुंडाकला सहित खादर क्षेत्र के कई गांव अनजाने बुखार से पीड़ित है।
पांच सालों में एक कैंसर विशेषज्ञ भी नहीं मिला
पिछले पांच सालों में कई गांवों में कैंसर के शिकार मिल चुके हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग अब तक शासन से एक कैंसर रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं करवा पाया है। जिला अस्पताल में कैंसर से पीड़ित मरीज की सर्जरी तो दूर चिकित्सा तक शुरू नहीं हो पाती है। उन्हें मजबूरन देहरादून, दिल्ली, मेरठ, चंडीगढ़ जैसे शहरों में भेजना पड़ता है। वहां महंगा इलाज न कर पाने की स्थिति में 60 फीसदी मरीज दम तोड़ देते हैं।
कौन है इसके लिए जिम्मेदार
-।। दूषित हो चुका होगा भूगर्भ और मिल रहा दूषित पेयजल
-।। जिले सहित वेस्ट यूपी में बसी दर्जनों औद्योगिक इकाइयां, जिनसे निकले रसायनों ने नदियों को जहरीला बनाया।
-।। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिसने नदियों को प्रदूषणमुक्त रखने के सार्थक प्रयास नहीं किए।
-।। स्वास्थ्य विभाग, जिसने खतरे को जानने के बावजूद गंभीर रोगों की चिकित्सा के साधन नहीं जुटाए।
इनकी भी सुनिए
पुराने प्रोजेक्ट की नए सिरे से समीक्षा कराई जाएगी। इस बार गांवों की समस्या को सिरे से समाप्त करने के लिए योजना तैयार कर उस पर अमल किया जाएगा। शासन को भी रिपोर्ट भेज वहां से भी मदद लेने की कोशिश होगी।
पवन कुमार, जिलाधिकारी