डूडूमाजरा गांव के श्मशान के रास्ते का विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को शव का अंतिम संस्कार करने को लेकर फिर से यह विवाद गरमा गया। सूचना मिलने पर एसडीएम और सीओ फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने उनके सामने हंगामा करते हुए कहा, कि उनके श्मशान का रास्ता खुर्दबुर्द कर नदी में मिला दिया गया।
पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों को पूरी जानकारी है। कई महीने से विवाद चल रहा है, अभी तक रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में किसी के मरने पर वे अंतिम संस्कार के लिए श्मशान तक कैसे और कहां से जाए? एसडीएम और सीओ ने 15 दिन के भीतर समस्या का समाधान करने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत किया।
बता दें कि काफी समय से तहसील बेहट एवं थाना मिर्जापुर क्षेत्र के डूडू माजरा गांव के श्मशान घाट के रास्ते को लेकर ग्रामीणों का ढाब्बा गांव निवासी एक व्यक्ति के साथ विवाद चल रहा है। आरोप है कि उसने उनके श्मशान घाट का रास्ता खुर्दबुर्द कर बरसाती नदी में मिला दिया है। उसके खिलाफ वें पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार शिकायतें भी दर्ज करा चुके है, लेकिन आज तक उसके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। दो माह के भीतर उनके गांव में चार मौत हो चुकी है।
अधिकारी झूठे वादे कर शव का अंतिम संस्कार कराकर चले जाते है, लेकिन रास्ते की कोई व्यवस्था नहीं कराई गई। मंगलवार को गांव में कैंसर से पीड़ित 70 वर्षीय केहर सिंह की मौत हो गई थी। शव के अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी। बुधवार की सुबह एसडीएम डॉ. सुरेश कुमार, तहसीलदार योगेंद्र यादव एवं सीओ नरेंद्र राणा थाना मिर्जापुर एवं कोतवाली बेहट पुलिस को साथ लेकर मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों ने उनके सामने हंगामा किया और सवाल किया, कि वें शव को श्मशान घाट तक कैसे लेकर जाए? सूचना मिलते ही कांग्रेस के बेहट विधान सभा क्षेत्र प्रभारी नरेश सैनी भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाया। इसके बाद ही एसडीएम एवं सीओ ने 15 दिन के भीतर रास्ते की व्यवस्था कराने का भरोसा दिलाकर लोगों से शव का अंतिम संस्कार कराया।