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कॉलेज प्रबंधन पर प्रयोगात्मक परीक्षा से वंचित रखने का आरोप

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डीएम कार्यालय पर ज्ञापन देने पहुंची छात्राएं - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। बिहारीगढ़ क्षेत्र के दून कॉलेज में पढ़ने वाले बीएड के छात्र छात्राओं ने प्रयोगात्मक परीक्षा से वंचित रखने और एजेंट के माध्यम से बैंक खाता खुलवाने तथा शुल्क प्रतिपूर्ति निकालने का भी आरोप लगाया है। वहीं, कॉलेज चेयरमैन का कहना है कि आरोप झूठे हैं, क्योंकि खाते खुद विद्यार्थियों ने खुलवाए और शुल्क प्रतिपूर्ति भी निकाल ली है, जिस बारे में वह तीन महीना पूर्व ही अधिकारियों को लिखित सूचना भेज चुके हैं।
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शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचे 18 छात्र छात्राओं ने बताया कि सत्र 2018-20 बीएड के लिए उनका दाखिला दून कॉलेज में हुआ। आरोप है कि दो एजेंटों के माध्यम से उनका दाखिला कराया गया और बैंक खाता खुलवाया। बैंक पासबुक भी एजेंट ने अपने पास रख ली थी। प्रथम वर्ष यानी 2018-19 में उनकी पढ़ाई चलती रही। परीक्षाएं भी हुईं। दूसरे वर्ष 2019-20 की प्रयोगात्मक परीक्षाओं की बात आई तो कॉलेज ने उन्हें परीक्षाओं में शामिल करने से इनकार कर दिया। आरोप है कि दूसरे वर्ष में सरकार से प्राप्त शुल्क प्रतिपूर्ति भी निकाल ली गई। इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत करने पर गत 17 नवंबर को बिहारीगढ़ थाने पर बैठक हुई, जिसमें एजेंट ने खातों से निकाली गई धनराशि कॉलेज प्रबंधन को देने की बात कही थी। इसके बाद उन्हें 18 नवंबर को प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए बुलाया, लेकिन परीक्षा नहीं कराई और फिर अगले दिन 19 नवंबर को परीक्षा देने आने के लिए कह दिया। 19 नवंबर को कॉलेज कोड 635 के विद्यार्थियों की परीक्षा करा दी, लेकिन कॉलेज कोड 787 के विद्यार्थियों की परीक्षा नहीं कराई। इस प्रबंधन से शिकायत करने पर बताया कि 17 नवंबर को परीक्षक आकर परीक्षा लेकर चले गए हैं, इसलिए अब आपकी परीक्षा नहीं होगी। छात्रा दीपा रानी, रोहित कुमार, रूची, सारिका, प्रियंका, विनोद, नेहा, रूपा, प्रतिक्षा, संगीता सहित 18 छात्राओं ने कहा कि कॉलेज प्रबंधन और एजेंट की वजह से उनकी प्रयोगात्मक परीक्षा छूट गई है, उन्हें न्याय दिलाया जाए। उधर, कॉलेज चेयरमैन प्रवीण चौधरी का कहना है कि उक्त विद्यार्थियों ने खुद ही अपने खातों से शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम निकाली है और कॉलेज में दोनों वर्ष का शुल्क भी जमा नहीं कराया है। पहले वर्ष में शुल्क जमा नहीं कराने के बावजूद इनकी परीक्षाएं कराई गई थीं, इसके बावजूद झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
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