प्रथम नवरात्र पर मंगलवार को देवी भगवती के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री देवी की पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिरों में मां के जयकारे गूंजते रहे। मां के भक्तों ने उपवास रखा और विधिवत पूजा-अर्चना की।
मंगलवार को चैत्र मास का पहला नवरात्र होने के कारण मंदिरों में सुबह से ही भक्त मां की पूजा अर्चना को पहुंचने लगे रहे। भक्तों ने चुनरी नारियल, फल आदि मां को अर्पण कर परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रथम नवरात्र पर दोपहर तक मंदिर में भीड़ अधिक रही।
उन्होंने कहा कि माता अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर कर परिवार में सुख शांति प्रदान करती है। कहा कि प्रत्येक वर्ष चतुर्दशी को मंदिर प्रांगण में विशाल मेला लगता है। इसी महीने 10 अप्रैल से आयोजित होने वाले मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी है।
पूजा व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के दाम आसमान छूने के बावजूद भी बाजार में खरीदारी को लोगों की भीड़ दिखाई पड़ी। इस मौके पर तिलक नारायण सेठ, विश्वनाथ गौतम, हरिओम सिंघल, हरि शंकर, गौरव, सुनील कुमार, सोनू, राजेंद्र, विकास, रजत आदि मौजूद रहे।
मां जगदंबा के विकराल स्वरूपों का वर्णन ः मेपल्स एकेडमी में आदि शक्तियों की अधिष्ठात्री जगदंबा के स्वरूपों का वर्णन किया गया। बच्चों ने देवी दुर्गा के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
शिक्षिकाओं ने देवी के विकराल रूपों के बारे में बताया। प्रधानाचार्य ने बताया कि देवी दुर्गा ने ब्रह्मा द्वारा रचित सृष्टि को राक्षसों के अनेक अत्याचारों से मुक्त किया। जगदंबा ने दुर्गा, काली, चंद्रघंटा आदि का रूप दिखाकर नारी शक्ति का प्रभुत्व स्थापित किया। दुर्गा का यह स्वरूप नारी शक्ति का प्रेरणास्रोत है।