सहारनपुर। इंटरनेशनल सोसायटी फॉर ट्रुथ कॉन्शसनेस के संस्थापक और निर्देशक स्वामी ओंकारानंद सरस्वती ने गोशाला रोड स्थित परमहंस सत्संग भवन में प्रवचन करते हुए कहा कि संन्यासी का जीवन परोपकार का जीवन होता है। परोपकार ही ईश्वर से साक्षात्कार का सबसे बड़ा साधन है और यही सच्चे संन्यासी होने का परिचय भी है।
लॉकडाउन के दौरान सत्संग भवन में रुके स्वामी ओंकारानंद सरस्वती ने शुक्रवार को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उपासना काल में सभी लोग धैर्य एवं विश्वास के साथ पूर्ण सावधानी बरतें। जिससे कोरोना जैसी भयंकर महामारी को जड़ से समाप्त किया जा सके। इस महामारी का एक मात्र इलाज धैर्य, विश्वास और सावधानी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकाडउन के फैसले को सर्व हितकारी बताते हुए प्रशासन की सतर्कता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रकृति का सम्मान करो और उसे समझो। उन्होंने अपील की कि रोजाना ध्यान और हवन करें। इसके साथ ही गायत्री और महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करें। इससे मानव को ऊर्जा प्राप्त होगी। जो इस महामारी के नकारात्मक शक्ति से लड़ने में सहायक होगा। सभी लोग अपने अपने घरों में अनंत शक्ति एवं सामर्थ्य वाले परमात्मा से प्रार्थना करें। इससे हम सबका उत्साह बढ़ता है और संकट से मुक्ति मिलेगी।