समाजसेविका और स्वतंत्र पत्रकार तीस्ता सीतलवाड का मानना है कि जातिवाद और छुआछूत देश की अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने चुनावों में जाति और मजहब के नाम पर वोट मांगने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं की निंदा करते हुए इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव से पहले बड़ी मुहिम छेड़ने की बात भी कही। इसके अलावा उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और समानता को संविधान की सबसे बड़ी ताकत भी बताया।
सहारनपुर पहुंची तीस्ता सीतलवाड ने पूर्व राज्यमंत्री संजय गर्ग के निवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में भी जातिवाद हावी है। यहां कई राजनीतिक दल और नेता जाति के नाम पर वोट मांगकर जीतते आए हैं, जिनकी वजह से समाज के भोली-भाली जनता जातियों और धर्म में बंटकर रह जाती है।
उन्होंने दुख जताया कि दलों के चुुनावी एजेंडों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा नहीं रहती। उन्होेंने बताया कि वह उत्तर प्रदेश में ग्रुप बनाएंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मॉनिटरिंग ग्रुप बनेगा। यह ग्रुप चुुनावों के दौरान नेताओं के भाषणों, समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर आने वाले विज्ञापनों तथा होर्डिंग्स और पंपलेट्स पर नजर रखेगा। जो भी दल या नेता समाज को तोड़ने या जातिवाद को बढ़ावा देने की बात करेगा, उसके खिलाफ प्रशासन से शिकायत करने के साथ ही चुनाव आयोग से भी शिकायत की जाएगी।
तीन तलाक के मुद्दे को तिस्ता ने मुस्लिम महिलाओं का व्यक्तिगत मामला बताया। कहा कि अनेक मुस्लिम महिलाएं पहले भी तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट जाती रही हैं। यदि किसी महिला को लगता है कि तीन तलाक में उसके साथ अन्याय हुआ है तो वह कोर्ट जा सकती है।
शाह का बयान गैर संवैधानिक
ः तिस्ता ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बयानों की निंदा की।