जिलेभर में छठ पूजा धूमधाम से मनाई गई। षष्ठी को महिलाओं ने दिन भर निर्जल उपवास रखा। शाम को बड़ी नहर एवं पांवधोई नदी पर पहुंचकर पानी में खड़े होकर सूर्य उपासना की। अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया और गीत गाए। बच्चों ने नहर के किनारे आतिशबाजी की।
चार दिन तक चलने वाले इस पर्व को लेकर लोगों में उत्साह नजर आया। छठ पूजा के तीसरे दिन षष्ठी को महिलाओं ने पूरे दिन निर्जल उपवास किया। घर को पूरी तरह से स्वच्छ किया गया। पूजा के लिए एक बांस की बनी हुई बड़ी टोकरी में पूजा का सभी सामान डाल कर पूजा स्थल पर रख दिया।
वहां गन्ने के पेड़ से एक छत्र बनाकर और उसके नीचे मिट्टी का एक बड़ा बर्तन, दीपक, तथा मिट्टी के हाथी बना कर रखे और उसमें पूजा का सामान रख दिया।
घर पर पूजा अर्चना करने के बाद शाम को नारियल, मौसमी फल, केले की पूरी, नारियल, मूली, अखरोट, बादाम, नारियल, घड़ा, दीपक, गन्ने ले कर एवं सभी सामान टोकरी में रख कर लोग सिर पर रखकर बड़ी नहर एवं पांवधोई नदी के घाट पर पहुंचे। महिलाएं सूर्य की उपासना के गीत गाते हुए चल रहीं थी।
नदी एवं नहर के किनारे पहुंचकर महिलाओं ने नहर एवं नदी से मिट्टी निकाल कर छठ माता का चौरा बनाया। केले के पत्तों, गन्नों से छत्र बनाया। वहां पूजा का सारा सामान रख कर नारियल चढ़ाया और दीप जलाया।
लोगों ने घुटनों तक पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य की पूजा की तथा अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। महिलाओं ने नहर में दीपदान किया एवं नहर के किनारे बैठकर गीत गाए तथा अपने परिवार की सुख, समृद्धि की कामना की।
मोहल्ला हिम्मतनगर निवासी रमेश ने बताया कि सोमवार को सुबह सूर्योदय से दो घंटे पहले ही नहर पर उन्हें पहुंचना है और सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देना है। महिलाएं सुबह तक निर्जला उपवास रखेंगे।
सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजा की जाएगी और घर पहुंचकर पूजा करने के बाद ही महिलाएं अपना उपवास खोलेंगी।