सहारनपुर। नगर निगम क्षेत्र एक बार फिर ओडीएफ प्लस-प्लस घोषित हुआ है, लेकिन अभी रैंक मिलना बाकी है। जिसे लेकर नगर निगम के अधिकारी गदगद हैं। वहीं महानगर में शौचालयों की हालत परिणाम से उलट है। नगर निगम ने जिस शौचालय को बेस्ट शौचालय बताकर एमओएचयूए (मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स) की टीम के सामने पेश किया था, वहां कमोड और फर्श टूटे पड़े हैं। पानी की टोंटियां गायब हैं और पानी लगातार बह रहा है। मुख्य दरवाजे का आधा हिस्सा गायब है और शौचालय के भीतर गंदगी है। आलम यह है कि ज्यादातर लोग शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
नगर निगम सहारनपुर ने ओडीएफ प्लस प्लस के लिए दिसंबर 2021 में आवेदन किया था। इसके बाद एमओएचयूए की टीम ने सहारनपुर पहुंचकर 11 से 13 जुलाई तक महानगर के शौचालयों का सर्वे किया था, जिससे यह तय किया जा सके कि सहारनपुर ओडीएफ प्लस प्लस की श्रेणी में आने लायक है या नहीं। नगर निगम ने सभी 57 शौचालयों की सूची सर्वे टीम को सौंपी थी। निगम ने उक्त शौचालयों की कैटेगरी भी तय करके टीम को दिए थे। यानी कौन सा शौचालय अच्छा है और कौन सा सामान्य है। सर्वे टीम ने 34 शौचालयों का सर्वे किया। खास बात यह है कि निगम ने जिन शौचालयों को बेस्ट बताकर पेश किया था सर्वे टीम ने भी उन्हें एस्पिरेशनल (आकांक्षा, अभिलाषा या तमन्ना) माना है। नगर निगम के दावों और एमओएचयूए के परिणाम के बाद अमर उजाला ने चक हरेटी की मलिन बस्ती में स्थित उस शौचालय की पड़ताल की, जिसे निगम ने बेस्ट (बढ़िया) बताया और सर्वे टीम ने एस्पिरेशनल माना है। शौचालय के मेन गेट का आधा हिस्सा गायब मिला है। अंदर फर्श पर बिछी टाइल्स जगह जगह से टूटी मिली। वॉशबेसिन के नीचे कचरा पड़ा मिला। यहां दो कमोड लगे हैं, जिनमें एक सामान्य और दूसरा इंग्लिश है। सामान्य शीट वाले शौचालय में फ्लैश का ढक्कन टूटकर अंदर पड़ा हुआ है। टंकी की टोंटी गायब है और कई दिन से पानी बह रहा है। कमोड अपनी जगह से हटकर टेढ़ा हुआ है। ढक्कन टूटा पड़ा है और पानी बह रहा है। यूरिनल के नीचे की टाइल्स धंसकर टूटी पड़ी मिली। खास यह भी है कि लेबर कॉलोनी, मोअज्जमपुरा और टॉवर बॉडीज ऐसी जगह रही, जहां सर्वे टीम को शौचालय ही नहीं मिला है।
दो साल भी नहीं टिका शौचालय
महानगर के वार्ड 13 चकहरेटी की मलिन बस्ती स्थित शौचालय स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब 3.5 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। शौचालय का लोकार्पण महापौर संजीव वालिया के द्वारा वर्ष 2020 में किया गया था। यानी शौचालय को इस्तेमाल में आए दो वर्ष भी पूर्ण नहीं हुए हैं और उसकी हालत बद से बदतर हो गई है। निर्माण में भी लापरवाही बरती गई है, जिसकी वजह से टाइल्स धंस चुकी हैं।
दो साल से हस्तांतरित नहीं हुए 46 शौचालय
नगर निगम में 57 शौचालय पुराने समय से बने हैं। इनमें 31 सामुदायिक शौचालय और 26 सार्वजनिक शौचालय हैं। खास बात यह है कि 46 शौचालय स्वच्छ भारत मिशन के तहत नए बनाए गए हैं। इन शौचालयों को बने करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन यह अभी तक नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं।
एक वर्ष के लिए महानगर एक बार फिर ओडीएफ प्लस-प्लस घोषित हुआ है। निश्चित रूप से नगर निगम ने इस क्षेत्र में अच्छा काम किया है तभी यह उपलब्धि मिली है। ओडीएफ प्लस-प्लस घोषित होने से हमें और बेहतर कार्य करने की ऊर्जा मिलेगी। शहर को और बेहतर बनाना ही निगम का उद्देश्य है।
राजेेश यादव, अपर नगरायुक्त।
शौचालय में टोंटी नहीं होने से बहता पानी, टूटा फ्लैश का ढक्कन और भरी गंदगी।- फोटो : SAHARANPUR
शौचालय के मेन गेट का आधा हिस्सा गायब।- फोटो : SAHARANPUR
अपनी जगह से खिसकी और टूटी इंग्लिश सीट और अंदर रखे व्हाइपर आदि।- फोटो : SAHARANPUR