सहारनपुर में नोटबंदी की मार से उबर रहे विश्वविख्यात वुड कार्विंग उद्योग को अब टैक्स की मार का झटका लग गया है। जीएसटी लागू होने के बाद लकड़ी उद्योग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो चुका है।
सबसे अहम बात यह है कि जीएसटी के दायरे में हजारों लकड़ी कारखाने आ गए हैं, ऐसे में कारोबार करने के लिए उन्हें सबसे पहले जीएसटी नंबर लेना होगा। लकड़ी पर टैक्स लगने के कारण वह उस महंगाई का तड़का आएगा और करीब छह महीने मिल चुके एक्सपोर्ट के आर्डर पर भी इसका असर पड़ेगा।
फिलहाल जीएसटी के दायरे में आने के बाद वुडकॉर्विंग कारोबारी पशोपेश में हैं। हस्तशिल्प श्रेणी में शामिल सहारनपुर का लकड़ी उद्योग जीएसटी के तहत 28 फीसदी टैक्स के दायरे में आ गया है।
लकड़ी पर टैक्स लगने के कारण ना केवल उत्पादों पर इसका असर पड़ेगा, बल्कि छोटे कारोबारियों को टैक्स के लिए माथापच्ची करनी होगी। सहारनपुर में करीब 25 हजार छोटे-बड़े कारखानों को टैक्स के दायरे में आने के कारण इनमें फौरी तौर पर ज्यादातर ने कामकाज ही बंद कर दिया है।
यहां बता दें वुडकॉर्विंग उद्योग से जुड़े ज्यादातर लोग कम पढ़े लिखे हैं और यही कारण है कि जीएसटी की बारीकियां उन्हें समझ नहीं आ रही हैं। ऐसे में इस कारोबार पर इसका असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक्सपोर्ट्स जीएसटी के चलते सहमे हुए हैं। सहारनपुर वुडकॉर्विंग एसोसिएशन के अध्यक्ष शेख फैजान का कहना है कि इस वक्त क्रिसमस के लिए उत्पाद तैयार होना है।
मगर जीएसटी लागू होने के कारण छोटे कारखाने बंदी के कगार पर आ गए। यही हालत रही तो सप्लाई समय से नहीं कर पाएंगे। पहले नोटबंदी के चलते भी देर हुए माल पर या तो उन्हें पैसे कम करने पड़े या उनके आर्डर कैंसिल हो गए।
अगर इस बार ऐसा रहा तो विदेेशी बॉयर का थोड़ा विश्वास भी कम होगा। उनका कहना है कि सहारनपुर में वुडकॉर्विंग से जुड़ा मजदूर दिहाड़ी पर काम करता है, जीएसटी के चलते छोटे कारखाने बंद हो जाएंगे।