सहारनपुर में स्वच्छ भारत मिशन को शुरू हुए आज पूरे दो साल हो चुके हैं। इन दो सालों में स्वच्छता को लेकर खूब शोर मचा, सरकारी पैसा भी खर्च किया गया, मगर हालात में कोई खास बदलाव अभी तक नहीं आया है।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को शहर के अनेक इलाकों का भ्रमण कर स्वच्छ भारत मिशन के तहत हुए बदलाव को जानने का प्रयास किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक दो साल पहले स्वच्छ भारत मिशन की नींव रखी थी।
उनका मकसद शहर और गांवों को गंदगी से मुक्त करना था। मिशन को शुरू हुए दो साल बीत चुके हैं, मगर इन दो सालों में न तो सफाई व्यवस्था में कोई खास सुधार आया है और न ही लोगों की सोच में।
हालांकि विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। आज भी शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग खुले में लघुशंका और शौच कर रहे हैं।
शहर की बात तो छोड़िये नगर निगम कार्यालय और कलक्ट्रेट तक में लोग खुुले में लघुशंका करते मिल जाएंगे। विकास भवन के अनेक कोने पान की पीक से सने पड़े हैं। जो यह बताने के लिए काफी हैं कि स्वच्छता को लेकर लोगों की सोच में कोई खास बदलाव नहीं आया है। इसके अलावा शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं।
नगर निगम ने खुले में शौच को रोकने के लिए 1780 निजी शौचालयों का लक्ष्य सर्वे के आधार पर निर्धारित किया था। इसमें एक परिवार को शौचालय के लिए चार हजार रुपये केंद्र और चार हजार रुपये प्रदेश सरकार की ओर से मुहैया कराए जाने हैं।
1100 शौचालयों के फॉर्म अभी तक सत्यापित हो चुके हैं। इनमें से 345 लोगों को अभी चार-चार हजार रुपये दिए भी जा चुके हैं। बाकी का काम लटका है। ऐसे में 1780 शौचालयों के लक्ष्य पाने में और समय लग सकता है।
जिन कॉलोनियों या बस्तियों में निजी शौचालय बनाना मुश्किल है। नगर निगम वहां सामुदायिक शौचालय बनवाकर दे रहा है। इसके लिए नगर में सर्वे के आधार पर 49 जगहों का चयन किया गया था।
इनमें से अभी तक 24 ही जगहों पर शौचालयों का निर्माण कराया गया है। मगर इनमें से भी अभी तक अनेक शौचालय चालू नहीं हो सके हैं, जिनपर ताले जड़े हुए हैं।
कचरा शहर और नगर निगम के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। नगर निगम के पास कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं है। अभी तक शहर के कचरे को बाहर गांवों के पास खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर डाला जा रहा है।