सहारनपुर में समाज कल्याण निदेशालय द्वारा काली सूची में डाले गए जिले के 21 कॉलेजों में से अधिकांश कॉलेजों के संचालक हाईकोर्ट से स्टे ले आए हैं। कोर्ट ने इन कॉलेजों को पहले की तरह संचालित किए जाने के आदेश दिए गए हैं।
गरीब परिवार के बच्चों का वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति की करोड़ों रुपये की धनराशि हड़पने के आरोप में लखनऊ से आई टीम की जांच के बाद समाज कल्याण निदेशालय ने जिले के 21 कॉलेजों को काली सूची में डाल दिया है।
इससे मैनेजमेंट के कॉलेजों में हड़कंप मचा है। इन कॉलेजों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। कॉलेजों ने पहले तो एफआईआर की कार्रवाई पर कोर्ट में अपील कर स्थगनादेश प्राप्त लिया।
उसके बाद काली सूची में डाले जाने के खिलाफ सभी कॉलेज हाईकोर्ट जा पहुंचे। समाज कल्याण विभाग के सूत्रों के अनुसार अब तक करीब 15 कॉलेजों ने स्टे लेने का दावा किया है।
इनमें से कुछ कॉलेजों ने कोर्ट के आदेश की छाया प्रति समाज कल्याण विभाग के कार्यालय को सुपुर्द कर दी है, जबकि कुछ ने निदेशालय में ही आदेश की प्रति जमा करा दी है। विभाग के अनुसार कॉलेजों ने दावा किया है कि कोर्ट ने विभाग को आदेश दिए हैं कि कॉलेजों को पूर्व की भांति चलने दिया जाए।
कॉलेजों का दावा सही है और विभाग द्वारा पूर्व की भांति इन कॉलेजों को चलने दिया तो इन कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति मिलने की उम्मीद है। हालांकि जिन कॉलेजों के स्थगनादेश प्राप्त नहीं हुए हैं, विभाग उनसे रिकवरी की तैयारी कर रहा है।
इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी यश कुमार वर्मा का कहना है कि अधिकांश कॉलेजों द्वारा कोर्ट से स्टे लेने का दावा किया जा रहा है। इनमें आठ कॉलेजों का स्थगनादेश जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में प्राप्त हो गए हैं।
हो सकता है कुछ ने निदेशालय में भी आदेश की प्रति जमा कराई हो, लेकिन अभी निदेशालय से यथावत स्थिति रखने के संबंध में भी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।