सहारनपुर में सरकारी अस्पताल की एंबुलैंस बिना ऑक्सीजन के ही मरीजों को लेकर दौड़ रही है। सामान्य जांच की जो मशीनें सालों से खराब पड़ी है, उनकी आज तक कोई सुध नहीं ली गई।
सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण मशीनें नहीं होने की स्थिति में मरीज इलाज के लिए बाहरी जिलों का रुख करने को मजबूर है। यहां तक कि चिकित्सालय में दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है।
जनपद के जिला अस्पताल में हर दिन हजारों की संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में मरीजों को खानापूर्ति कर लौटाया जा रहा है। आलम यह है कि अस्पताल में मरीजों के लिए पर्याप्त बेड भी नहीं है।
एक बेड पर दो मरीजों तक का इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी की बात करें तो चिकित्सकों के 246 पदों पर मात्र 73 चिकित्सक ही तैनात है।
शेष 173 चिकित्सकों के पद खाली है। ऐसे में सीएचसी तो एक एक चिकित्सक के सहारे ही चल रही है। जबकि ज्यादातर पीएचसी ऐसी है जहां वर्षों से एक भी चिकित्सक ने झांकना तक उचित नहीं समझा।
अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलैंस की बात करें तो ज्यादातर एंबुलैंस बिना ऑक्सीजन के ही मरीजों को लेकर दौड़ रही है। ऐसी एंबुलैंस में मरीजों की जान पूरी तरह सांसत में है।
घातक बीमारी से ग्रस्त मरीज अस्पताल पहुंचते हैं तो उनके इलाज के लिए चिकित्सक हाथ खड़े कर देते हैं। सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड समेत अन्य कई महत्वपूर्ण जांच की मशीनें न होने की स्थिति में मरीजों को मजबूर होकर निजी चिकित्सकों अथवा जिले से बाहर की ओर रुख करना पड़ रहा है।
एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, डिजिटल एक्सरे, एमआरआई समेत अन्य महत्वपूर्ण जांच की जो मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी है, उनकी आज तक कोई सुध नहीं ली गई। सरकारी जांच रिपोर्ट में सही नहीं आने के कारण भी मरीज परेशान है।
ऐसे में मरीजों को निजी चिकित्सक के यहां पहुंचकर जेब ढीली करनी पड़ रही है। जनपद में 13 सीएचसी और 40 पीएचसी है। सीएचसी और पीएचसी पर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर नजर डाले तो सरकारी लापरवाही मरीजों पर पूरी तरह हावी है।
ज्यादातर सीएचसी और पीएचसी में मरीजों को बिना दवाओं के ही उपचार दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारी इन समस्याओं की हकीकत जानने के बावजूद अनजान बने है।