सहारनपुर में भीम आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनजीत सिंह से वेस्ट यूपी के जिलों में हुई हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। एक साजिश के तहत दलितों की छवि को खराब करने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि एससी एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में उनका संगठन मुखर रहेगा। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरोकारी के लिए बुधवार तक का समय दिया गया है। दो दिन बाद बैठक कर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाएगी। भीम आर्मी चाहती है कि दबंगों में इस अधिनियम का खौफ रहे।
भीम आर्मी भी एससी/एसटी एक्ट के संशोधन के विरोध में अन्य दलित संगठनों के साथ सोमवार को भारत बंद में शामिल रही थी। भीम आर्मी के प्रवक्ता मनजीत सिंह ने मंगलवार को अमर उजाला के साथ बातचीत की।
उन्होंने कहा कि भीम आर्मी भारत एकता मिशन संविधान को मानने वाला संगठन है। जो भी हिंसक घटनाएं हुईं हैं, वह दुर्भाग्यपूर्ण हैं, इसकी भीम आर्मी निंदा करती हैं। जिन जिलों में हिंसा हुई उसके लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है।
प्रशासन के एक्शन पर दलितों ने रिएक्शन किया है। कई न्यूज चैनल भी प्रशासन के साथ मिले हुए थे। जिन्होंने दलितों के रिएक्शन को तो अपने कैमरे में कैद किया, मगर पुलिस द्वारा चलाई गई गोलियों की कोई फुटेज नहीं बनाई। साजिश के तहत दलितों की छवि को खराब करने की कोशिश की गई।
आंदोलनकारियों के हाथों में डंडे, तलवारें और तमंचे के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बंद के दौरान कोई भी दलित हाथों में डंडे लेकर नहीं पहुंचा था। उनके हाथों में केवल झंडे थे। तमंचे और तलवारें होने की बात पूरी तरह झूठी है।
हमें पता चला है कि कई जगहों पर कुछ बाहरी लोग माहौल खराब करने के लिए आंदोलन में शामिल हुए थे। हो सकता है तमंचे और तलवारें वही लेकर पहुंचे हों, जिससे दलितों के आंदोलन को हिंसक बनाया जा सके। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।
उन्होंने गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी की पूर्व में मेरठ में की गई भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर को लोक सभा चुनाव लड़ाने संबंधी घोषणा पर कहा कि भीम आर्मी पूरी तरह गैर राजनीतिक संगठन है।
बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि बिना सामाजिक क्रांति के राजनीतिक क्रांति अधूरी है। हम उसी राह पर चल रहे हैं। इस समय हमारा पूरा फोकस सामाजिक क्रांति पर है। भीम आर्मी न तो चुनाव लड़ेगी और न ही किसी दल को समर्थन करेगी। अभी भीम आर्मी का स्वरूप गैर राजनीतिक ही रहेगा। भविष्य में क्या परिस्थिति होगी अभी कहना मुमकिन नहीं है।
भीम आर्मी ने उठाई हिंसा की सीबीआई जांच की मांग
भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने सोमवार को बंद के दौरान देश भर में जगह-जगह हुई हिंसक घटनाओं की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। साथ ही हिंसा में मारे गए दलितों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है।
मंगलवार को बामियान बुद्ध विहार में पत्रकार वार्ता करते हुए भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में शांतिपूर्ण बंद का आह्वान किया गया था।
मगर अन्य जनपदों में दलितों के आंदोलन में बाहरी लोग घुस आए, जिन्होंने माहौल खराब किया। इसके अलावा अनेक जगहों पर पुलिस की ओर से शुरूआत की गई, जिसकी वजह से भीड़ बेकाबू हो गई। कहा कि संगठन पूरी तरह से हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के साथ है।
हमारी मांग है कि सरकार हिंसा के कारणों का पता लगाने के लिए घटना की सीबीआई से जांच कराए। साथ ही मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी हम कर रहे हैं। हमारी तीसरी मांग पुलिस द्वारा जेल में डाले गए बेगुनाह युवकों की रिहाई है। पत्रकार वार्ता में डॉ. अजय गौतम, विनोद, प्रवीन गौतम आदि मौजूद रहे।