ब्रिटिश अधिकारी की हत्या के मामले में भगत सिंह को फांसी देने के मामले में लाहौर कोर्ट में बुधवार से शुरू हुई सुनवाई पर यहां रह रहे शहीद-ए आजम भगत सिंह के भाई कुलतार सिंह के पुत्र ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि आज भी परिवार उनके बेगुनाह साबित होने का इंतजार कर रहा है।
शहर के प्रदुम्न नगर स्थित आवास पर किरणजीत सिंह संधू ने बताया कि पाकिस्तान के लाहौर की अदालत में भगत सिंह को निर्दोष साबित करने के लिए याचिका पर बुधवार से सुनवाई शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह अविभाजित भारत के लिए आजादी की जंग लड़े थे। इसलिए विभाजन के बाद शहीद-ए आजम के सम्मान का जितना जुनून हिंदुस्तान में है, उतना ही पाकिस्तान में भी है।
संधू बताते हैं कि पाकिस्तान में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के प्रमुख इम्तियाज राशिद कुरैशी और इस संस्था से जुड़े अन्य सदस्यों ने भगत सिंह की शहादत के बाद भी उन्हें इस मामले में बेगुनाह साबित करने की जंग शुरू की। यह जंग एक शहीद के सम्मान की है और ब्रिटिशकाल में किए गए उस अन्याय के खिलाफ है जिसने युवावस्था में ही देश के क्रांतिकारी को शहीद होने पर मजबूर किया।
पाक की अदालत में शुरू हुई इंसाफ की इस जंग में शहीद-ए आजम की बेगुनाही साबित होगी, इसका उन्हें पूरा विश्वास है। वह बताते हैं कि यदि सुनवाई के दौरान उनके परिवार की पेशी की भी जरूरत पड़ेगी तो वे इसमें पूरा सहयोग करेंगे।
इसलिए दायर की गई थी याचिका
भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के प्रमुख इम्तियाज राशिद कुरैशी ने 2013 में लाहौर हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी। उनके मुताबिक लाहौर असेंबली में बम फेंकने के आरोप में भगत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में हत्या का आरोप लगाकर फांसी दे दी गई।
लाहौर के अनारकली पुलिस स्टेशन में 17 दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज की गई थी। उसके मुताबिक जान पी. सांडर्स हत्याकांड के केस में दो अज्ञात बंदूकधारियों का जिक्र है। इसमें भगत सिंह के नाम का जिक्र तक नहीं है। भगत सिंह के पक्ष में उस समय के गवाहों को नहीं सुना गया था।