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साइबर अपराधियों से हर पल रहें सावधान

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सहारनपुर। जिले में तेजी से बढ़ते जा रहे साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत सभी थानों, सार्वजनिक स्थलों पर दिशा निर्देश जारी करने के साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी जरूरी सावधानियों के प्रति सजग किया जा रहा है।
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दरअसल, सोशल साइटों पर एकाउंट हैक करके, एटीएम कार्ड बदलकर, फर्जी मोबाइल संदेश भेजकर जानकारी जुटाकर, पेटीएम या अन्य आनलाइन वॉलेट से मोटी रकम एेंठने से लेकर अन्य बड़े साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं। सराफा कारोबारी, व्यापारी से लेकर आम आदमी तक इन अपराधियों के जाल में फंसे हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले में हर माह 30 से 35 मामले साइबर क्राइम से जुड़े पहुंच रहे हैं।
इन्हीं हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने साइबर सेल और फोरेंसिक टीम से फीड बैक लेने के बाद जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत जो एडवाइजरी जारी की गई है। उसमें 20 से भी अधिक सावधानियां बरतने को कहा गया है।
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इन प्रमुख बिंदुओं के साथ जारी की गई एडवाइजरी
- काल, एसएमएस या अन्य माध्यम से ओटीपी, यूपीआई आईडी, एम-पिन, एटीएम पिन किसी को शेयर न करें
- केवाईसी के लिए एसएमएस पर ध्यान न दें और न ही किसी लिंक से सोशल एप या वॉलेट तक पहुंचने का प्रयास करें
- फोन काल या एसएमएस पर कोई भी निजी, बैंक खाते और रजिस्टर मोबाइल नंबर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बिल्कुल न दें।
- बड़े अमाउंट का झांसा देकर कोई भी छोटी रकम किसी अनजान मोबाइल नंबर से सोशल वॉलेट में न भेजें। यह खाते की जानकारी हैक करने की साजिश हो सकती है।
- किसी के भी कहने पर रिमोट एक्सेस एप जैसे क्विक सपोर्ट, एनी डेस्क, टीम व्यूवर, एयरड्रॉड आदि को लिंक से डाउनलोड या शेयर न करें
- किसी अनजान के संदेश पर किसी लिंक या एप को फारवर्ड भी न करें, बिना गार्ड, ब्लॉक स्क्रीन वाली एटीएम का प्रयोग करने से बचें।
- एटीएम कार्ड का पिन, आनलाइन वॉलेट के पासवर्ड हर सप्ताह में बदलते रहें और निजी स्तर पर उन्हें लिखकर भी रखें।
- सोशल साइटों या एप्लीकेशंस के माध्यम से आनलाइन शापिंग करने के दौरान रिक्वेस्ट मनी आप्शन के प्रयोग से बचें
- एनईएफटी-आरटीजीएस का बेहद जरूरत पड़ने पर ही प्रयोग करें और कोई भी लेनदेन करने के बाद बैंक की शाखा, लेनदेन कर्ता या प्रतिनिधि से मैनुअली कंफर्म जरूर करें।
- सोशल साइटों या एप्स पर चेट के माध्यम से किसी खाते का नंबर, कस्टमर आईडी, रजिस्टर मोबाइल नंबर या पासवर्ड शेयर करने से जरूर बचें।
- सोशल साइटों पर आपत्तिजनक या विवादित सामग्री डालने, ब्लैकमेलिंग या किसी की छवि को नुकसान करने से बचें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई होगी
- साइबर क्राइम का शिकार होने पर निकट के पुलिस थाने से लेकर साइबर सेल की टीम से संपर्क करें। शिकायत करने में देरी न करें। अन्यथा अपराधी तक पहुंचने में मुश्किल हो सकती है।
- हर लेनदेन और इंक्वायरी प्रोसेस का मैनुअल रिकार्ड भी रखें ताकि साइबर क्राइम का शिकार होने पर पुलिस या अन्य जांच टीम की मदद की जा सके।
जागरूक रहने से ही रुक जाएंगे 80 फीसदी साइबर अपराध
- एसएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि रोजाना की सोशल लाइफ और आनलाइन लेनदेन के समय जागरूक रहने भर से ही 70 से 80 फीसदी साइबर अपराध कम हो सकते हैं। इसलिए पुलिस की मदद से पहले खुद सजग जरूर रहें और अन्य लोगों को भी करें।
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